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नदी शृंखला की कुछ कविताएँ
श्रीप्रकाश
मिश्रमिश्
र
खुरदुराहट के ठीक पास से
बिल्कुल उसे छूकर
बहती है नदी
अपनी भंवरदार लुनाई के साथ
एक फूल
टपकना चाहता है
नदी पर
और लहरें उसे आवेष्टित कर
दे मारती हैं
लाश पर
(
श्रीप्रकाश मिश्र की अन्य कविताएँ )
पूर्णिमा वर्मन बरसाती दोहे .......
भादों आया देख के हुई सुहानी शाम
मौसम भी लिखने लगा पत्तों पे पैगाम।
चादर ओढ़ी सुरमई छोड़ सिंदूरी गाम
बात बात में बढ़ गयी बारिश से पहचान।
गिलयारे पानी भरे आंगन भरे फुहार
सावन बरसा झूम के भादों बही बयार।
(
पूर्णमा वर्मन के अन्य बरसाती दोहे
)
1 और 9
शीमा कलबसी
तारे
चमक रहे हैं करीब
गर्मियों की रात का स्वाद..
एक स्तब्ध शान्त रात
त्वचा पर
झरती पत्ती का कोमल चुम्बन
मैं, नंगे पाँव, तपिश में
चल रही हूँ, नग्न
(
शीमा कलबसी की अन्य कविताएँ
)
बच्चा
यश
मालवीय
बच्चा
धूप अपनी मुठ्ठी में
बंद कर लेना चाहता है
बच्चा
हवा के झोकों को
टाफियों की पन्नी की तरह
तहकर अपनी जेब में
रख लेना चाहता है
बच्चा नल से आती पतली धार में
अपनी नन्ही नन्ही हथेलियाँ फैलाकर
भर लेना चाहता है एक नदी
मुझे लगता है
बच्चा चह सब कर लेगा
जो वह चाहता है
जब घटाटोप अँधेरा घिरने लगेगा
वह अपनी धूपवाली मुटंटी खोल देगा
जब वातावरण में दम घुटने लगेगा
वह दोनों हाथों लुटाने लगेगा
जेब में तह करके रखे
हवा के जीवनदायी झोंके
जब दुर्भिक्ष की परछाँई बड़ी होने लगेगी
वह अपनी हथेलियों से
उलीचने लगेगा नदी
मुझे लगता है
बच्चा वह सब कर लेगा
जो वह चाहता है
(
यश मालवीय की अन्य कविताएँ
)
झूठ
दिव्या
माथुर
झटका
झिझोंड़ा
अटका
पटका
भटकाए
न भटका
गले में अटका
गया न सटका
मन में खटका
चेहरा लटका
कमबख्त
आँखों से
झटपट टपका
झूठ मेरा
(
दिव्या
माथुर की झूठ शृंखला की अन्य कविताएँ )
भाई की तलाश
आफताब अहमद
मैं घर का सबसे छोटा बेटा नहीं हूँ
मुझसे भी छोटा एक भाई है
है और था के बीच झूलता एक भाई,
नीली आँखों वाला, मुझसे कछ ऊँचा ६ फुट लम्बा कद्दावर भाई
कालेज से घर और घर से कालेज
कुल मिला कर यही थी उसकी दुनिया
ठंड की एक रात उसे पुलिस उठा कर ले गयी
कहाँ, यह किसी को नहीं पता
अगले दिन जब सब तरफ कोहरा छाया हुआ था
इस चाकू के धार वाले समय में
मैं अपने पिता के साथ
शहर के एक थाने से दूसरे थाने तक
अपने भाई को तलाश रहा था,
पूरे दिन तलाश के बाद भी
हम यह पता लगाने में असफल रहे कि मेरा भाई कहाँ है
हर थाने से एक रटा रटाया जवाब मिलता.. हमें पता नहीं
ऐसे गुजर गए कई कई दिनलेकिन भाई का पता नहीं चला
कई कई दिन और कई कई रातें
फिर सप्ताह महिने और साल
तलाश जारी रही लेकिन भाई का पता नहीं चला.........
(
आगे पढ़िए )
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