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सुब्रह्मण्यम
भारती की देशप्रेम की कविताएँ

सुब्रह्मण्यम भारती देश के
महानकवि हैं जिन्होंने तमिल भाषा में काव्य रचना की है। आपका जन्म
11 दिसम्बर
1882 को एट्टियपुरम तमिलनाडु में हुआ था। आप एक जुझारू शिक्षक,
देशप्रेमी और महान कवि थे। आपकी देश प्रेम की कविताएँ इतनी श्रेष्ठ
हैं कि आपको भारती उपनाम से ही पुकारा जाने लगा। सुब्रह्मण्यम
भारती के बारे में अधिक कहने की आवश्यकता नहीं, आपके योगदान
से हम सभी भारत वासी परिचित हैं। इस बार कृत्या में आपकी देश प्रेम
की कविताओं को प्रस्तुत किया जा रहा है।
वन्दे मातरम
जय भारत जय वन्दे मातरम।।
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जय जय भारत , जय जय भारत , जय जय भारत , वन्दे मातरम।
जय भारत जय वन्दे मातरम।।
एक वाक्य है केवल, जिसको दुहराना है
आर्य भूमि की आर्य नारियों, नर सूर्यों को वन्दे मातरम।
जय भारत जय वन्दे मातरम।।
एक वाक्य है केवल, जिसको दुहराना है
घुट घुट मरते भी अति पीड़ित , जन जन को वन्दे मातरम
जय भारत जय वन्दे मातरम।।
प्राण जाएँ पर चिर नूतन उमंग से भर कर
केवल एक वा।क्य गाएँगे हम सब मिल कर वन्दे मातरम।
जय भारत जय वन्दे मातरम।।
जय जय भारत , जय जय भारत , जय जय भारत , वन्दे मातरम।
जय भारत जय वन्दे मातरम।।

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नमन करे इस देश को
इसी देश में मातु पिता जनमें पाए आनन्द अपार,
और हजारों बरसों तक पूर्वज भी जीते रहे ,
अमित भाव फूले फले जिनके चिन्तन में यही
मुक्त कण्ठ से वन्दना और प्रशंसा हम करें
कहकर वन्दे मातरम, नमन करें इस देश को।।१।।
इसी देश में जीवन पाया, हमको बौद्धिक शक्ति मिली,
माताओं ने सुख लूटा है , जीवन का वात्सल्य भरे
मोद मनाया है यहीं जुन्हाई में हँसकर क्वारेपन का।
घाटों पर , नदियों के पोखर के क्रीडाओं की आनन्दभरी
कहकर वन्दे मातरम, नमन करें इस देश को।।२।।
गार्हस्थ्य को यहाँ नारियों ने पल्लवित किया है
गले लगाया है जनकर सोने से बेटों को
भरे पड़े हैं नभचुम्बी देवालय भी इस देश में
निज पितरों की अस्थियाँ इस माटी में मिल गई
कहकर वन्दे मातरम, नमन करें इस देश को।।३।।
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भारत देश सर्वोत्कृष्ट है
भारत देश सर्वोत्कृष्ट है।
निखिल विश्व में, अपना देश सर्वोत्कृष्ट है।
अपना देश सर्वोत्कृष्ट है।
भक्ति विराग प्रचण्ड ज्ञान में,
स्व गौरव में, अन्न दान में
अमृत वर्षक काव्य गान में
भारत देश सर्वोत्कृष्ट है।
धैर्य शक्ति में, सैन्य शक्ति में
परोपकार, उदार भाव में
सार शास्त्रों के ज्ञान दान में
भारत देश सर्वोत्कृष्ट है।
नेकी में तन की क्षमता में
संस्कृति में, अपनी दृढ़ता में
स्वर्ण मयूरी पतिव्रता में
भारत देश सर्वोत्कृष्ट है।
नव रचनात्मक कार्यों में रत
उद्योगों में परमोत्साहित
भुजबल और पराक्रम मंडित
भारत देश सर्वोत्कृष्ट है।
अति महान आदर्शों वाला
अवनी रक्षा का मतवाला
सिन्धु सदृश बृहद अनीवाला
भारत देश सर्वोत्कृष्ट है।
मेघाशक्ति मनोदृढ़ता में
शुभ संकल्प, कार्यक्षमता में
सत्य भावमय ध्रुव कविगण में
भारत देश सर्वोत्कृष्ट है।

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भारत माँ की ध्वजा
यह बहुमूल्य ध्वजा भारत माँ की है, देखो आओ।
सब मिल कर के श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ।।
कितना ऊँचा ध्वज स्तंभ है
यह वन्दे मातरम लिखित है
चमक रहा जो , फहर रही किस गति से दृष्टि टिकाओ।
सब मिल कर के श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ।।
यह न मात्र रेशमी वस्त्र है
झंझावातों से न त्रस्त है
तूफानों से भी अविचल उड़ती है मोद मनाओ।
सब मिल कर श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ।।
देखो ध्वज स्तंभ के नीचे
अद्भुत जन समूह दृग मींचे
ये योद्धा कहते तन देकर ध्वज की आन बचाओ।
सब मिल कर श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ।।
पंक्तिबद्ध यह दृश्य मनोहर
युद्ध कवच शोभित छाती पर
वीर शौर्यमय कितने चित्ताकर्षक हमें बताओं।
सब मिल कर श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ।।
मधुर तमिल भाषी नर यौद्धा
रक्तिम आँखो वाले क्षत्रिय
केवल वीर, मातु पद सेवकद
तुलुभाषी, तैलंग युद्ध प्रिय
सब मिल कर श्रद्धा और विनय से शीश झुकाओ।।
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उन्मादिनी माँ
अति भयावह रूप देखो मातु का
है हमारी माँ प्रबल उन्मादिनी
यह करेगी प्यार शिव उन्मत्त को
हाथ में जो तीव्र ज्वाला है लिए।।
उस मधुर संगीत सागर की प्रबल
मचलती सी उर्मियों की बाढ़ में
पुलक अवगाहन करेगी डूब कर
मोद में गोता लगाएगी सदा।।
अमृतवर्षी कवित उपवन में जहाँ
पवन नित दैविक सुगन्धि लिए चले
पहन हार परागपूर्ण प्रसून का
माँ करेगी नृत्य कर मे जाम लिए।।
जान लो , यह वेद ध्वनि उच्चारती
सत्य का ले शूल नाचेगी सदा।
मनन कर पठनीय शास्त्रों को सभी
वपन कर देगी जगत के सामने।।

महाभारत युद्ध क्या कुछ खेल है?
प्रगट होगी पार्थ की गाण्डीव में।
काट क्षण में कोटि रिपुओं को सदा
माँ मगन डूबी रहेगी रक्त में।।
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