रति सक्सेना



आँसुओं का खजाना

एक आँसू
उसके लिए
जो अपना ना बन सका

एक आँसू
अपना बनने का
दिखावा करने वाले के लिए

एक आँसू
अपने आप से
दोस्ती करवाने बाले के लिए

आँसुओं का खजाना
खत्म हो गया

आखिरी प्रार्थना

आखिरी वक्त
जब हौंठों पर जमे शब्दों पर
सोच बुझने लगेगी थक कर
तब
ना कोई शिकायत निकलेगी
ना कोई प्रार्थना

इस प्रार्थना को
क्यों ना उठा कर रख दूँ
आखिरी वक्त के लिए

चाँदनी की उधारी

उन सभी कदमो को
गिन कर देखूँ यदि
तुम्हारे साथ चले थे मैंने
पाँव फिर से
चलना भूल जाएँ
सड़क भूल जाए रास्ता

उन लम्हों को जोड़ कर देखूँ
बिताए थे तुम्हारे साथ
समय की धड़कन रुक जाए

उस आँच को
क्या पहचानोगे तुम
जिस में पकता रहा मेरा
अन्तस रस

तुम्हारे हर कदम
हर साथ
हर बून्द प्यार
चाँदनी की उधारी था


आसमान का आँसू

नन्ही सी इच्छा के लिए
कामना नहीं की,  कभी
आसमान का आँसू टपक पड़े
तारे की शक्ल में

अंकुरित सपने

उसने कुछ सपने
मेरी हथेली पर रख
मुट्ठी बन्द कर दी
पसीजी मुट्ठी लिए
मैं देखने लगी सपने
बीजों में अंकुर
अंकुर में रेशा
रेशे में जड़
दो पत्तियों पर खड़ा हुआ
लहराता दरख्त

आँख खुली तो पाया
उनके हिस्से में खड़ा था
वही दरख्त
जिसे लगाया था मैंने
अपने आँगन में

उसका खत

उसने नाम लिखा
फिर पता
पते के नीचे खींची लकीर
वहाँ से यहाँ तक
बन गया एक रास्ता

उसने बन्द किया लिफाफा
बन्द हो गई उड़ान
आसमान में चक्कर काटने वाली

लिफाफा आया
साथ आई छुअन
ढेर सारी यादों से घिरी
 


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