
क्षणिकाएँ
भर्ती
फौज का मनोबल
बढ़ाने के लिए
भर्ती
फिर शुरु हुई है
पर
उन नौजवानों के लिए
जिन्होंने
आत्म- समर्पण
किया है
सोच
इंसान की दिन- रात
न्यूक्लर ताकत बढ़ाने
की ख्वाहिश
व
आसमान में गिद्धों को
हर घर पर मंडराते देख
मन सोचने पर
मजबूर हो जाता है कि
कहीं ये गिद्ध
हमें कुछ कहना तो नहीं चाहते?
दीवाली

दीपावली की शुभ रात में
उस गरीब के घर का चूल्हा
आज तक नहीं जला
वह सोच कर यह
सो गया
कि उसकी दीपावली तो
तब होगी
जब उसके घर में
मोमबत्ती की नहीं
चूल्हे की लौ होगी
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