दिलीप कुमार कौल



दिलीप कुमार कौल युवा कवि, लेखक और पत्रकार हैं जो फिलहाल जम्मू में रहते हैं, विस्थापन का दंश उनके मन में उतना ही गहरा है जितना कि उस किसी भी कश्मीरी के मन में होगा जिसने कश्मीर के अच्छे दिन भी देखे हैं। यही दंश दिलीप की भटकन को रोक नहीं उनकी कविता यात्रा इतिहास की गलियों में भटकती रहती है।

विस्थापन के पन्द्रह बरस बाद

" सब ठीक हो जाएगा
और हम घर लौटेंगे"..
तकली पर सूत की तरह
कतता चला गया इंतजार
जिसे हमने ढालना चाहा दिनों, महिनों और बरसों में
पर एक सपाट बेरंग कपड़े की तरह
लिपट गया जो हमारे वजूद से
जैसे कि लाश से कफन!

यात्रा

" किसने देखा था
परिहासपुर का वैभव?"
" क्या प्रमाण है कि
प्रायः आता ही रहता था यहाँ
ललितादित्य?"
सोचते हैं पथिक गुजरते हुए
परिहासपुर के भग्नावशेषों के बीच से।
"कमलाहाट यहीं था क्या
जो बनवाया था महारानी कमला ने?"
क्रय- विक्रय के कोलाहल में
पाककला में पारंगत गृहणियों के
कंठस्वरों का संगीत
करता था आश्वस्त कि
जलेंगे चूल्हे परिहासपुर में
और कल्पनाओं में तैरते स्वाद
बदल जाएँगे अद्वितीय व्यंजनों में
ऐसा कमलाहाट यहीं था क्या?
जो बनवाया था महारानी कमला ने?"
अन्ततः नारियाँ ही तो होती हैं
महारानियाँ भी!
परन्तु ललितादित्य क्या था?
कवियों की तरह जिसने
लुटा दिए कोष
साकार करने के लिए अपनी कल्पनाएँ
क्या था वह ललितादित्य?
कहाँ है वह तथागत की महा करुणा
जो ढल गई थी
चौरासी हजार काँस्य प्रतिमाओं में?
भग्न राज्य विहार का
चौरासी हजार तौले स्वर्ण
कहाँ है?
कहाँ है अद्वितीय व्यंजनो की सुगन्ध?
परिहासपुर से गुजरते पथिक सोचते हैं
सोचते हैं।

*

कश्मीर पर शासन करने वाले कारकोट वंश के महानतम शासक ललितादित्य ने परिहासपुर नामक नगर बसाया।
श्री नगर से कुछ दूरी पर स्थित परसपुर में इस नगर के अवशेष अभी भी मिलते हैं 724  ईं से 761 ई तक कश्मीर पर शासन करने वाले ललितादित्य ने परिहासपुर में विष्णुपरिहास केशव की मूर्ति स्थापित करने के साथ- साथ विशाल चैत्य वाले राजविहार का निर्माण किया जहाँ तथागत बुद्ध की प्रतीमा स्थापित की गई। राज्य विहार के निर्माण में चौरासी हजार तोले स्वर्ण का इस्तेमाल किया गया। कुल मिलाकर ललितादित्य ने बुद्ध की चौरासी हजार काँस्य प्रतिमाएँ स्थापित करवाईं। उनकी  महारानी ने परिहासपुर में विशाल बाजार "कमलाहाट" का निर्माण करवाया, जिसका उल्लेख कवियों ने किया है। कल्हण के अनुसार परिहासपुर का वैभव इन्द्रलोक को भी मात करता था।


 


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