मुरली मनोहर श्रीवास्तव  की अन्य कविताएँ


मुरली मनोहर श्रीवास्तव पेशे से इंजीनियर हैं, फिलहाल वे एन टी पी सी लिमिटेड में अभियंता के पद पर काम कर रहे हैं। आप समाज से जुड़े अनेक सवालों, विचारों को कविता में लाते हैं और अपने समय से एक संवाद बनाने की कोशिश करते हैं। एक कविता संग्रह‍" सत्य जीतता है" - हिन्दी अकादमी दिल्ली से 1999 में प्रकाशित हो चुका है। E mail murlimanohars@yahoo.com


और मैं खुशी खरीद लाया

मैं
ड्राईंग रूम में
टांग पसारे
बुध्दू बक्से के चैनल बदल रहा हूँ
न्यूज स्पोर्ट्स फ़ैशन म्यूजिक
निर्विकार भाव से
पर्दे पर आ जा रहे हैं
बेटे ने टाप किया है
बेटी को पुरस्कार मिला है
मेरी प्रमोशन हो चुकी है
और श्रीमती जी शाम की पार्टी में व्यस्त हैं
मगर
कमरे में उदासी पसरी है।
मेरे आस- पास अनकहा दु: ख है
अचानक मैने कार उठाई
बच्चे को बैठा
मार्केट गया
एक शीतल पेय की बडी बोतल खरीदी
पेस्ट्री का डिब्बा लिया
रात के डिनर में पिज़ा पैक कराये
कुछ ज्यूलरी के आर्डर बुक किये
पर्दे बदलने के विचार के साथ
घर लौटा
सब चहक रहे थे
मेरे भीतर की उदासी और गहरी हो गयी
मैं
सबके लिये खुशियां खरीद लाया था
मगर मेरे लिये खुशी कौन लायेगा
मेरे पिता के पास पैसे नहीं हैं
उनका इलाज चल रहा है।
मैं फ़ोंन लगाता हूँ
हाल- चाल पूछता हूँ
वे बिस्तर पर पडे पडे
मेरी सफ़लताओं ले द्विगुणित होंने का
आशीर्वाद देते हैं
खुशी
टेलीफ़ोंन के तारों से
कान तक आती प्रतीत होती है
तभी जोर की खांसी के साथ
आवाज डूबने लगती है
मेरा कर्तव्य बोध चीत्कार उठता है
और खुशी मेरे हृदय के दरवाजे पर
दस्तक देने से पहले लौट जाती है।

अधिकार

जब पक्षी के डैने टूटते हैं
तब
उडने के लिये
बहुत फ़डफ़डाता है
इससे पहले
वह
उडने को
नैसर्गिक अधिकार समझता है।

घर

अविश्वास की आंधी चली
और
कंक्रीट के घर की छत उडा ले गयी
इससे बेहतर तो
कच्चे मकान थे
जिसकी फ़ूस के नीचे
इन्सानी रिश्ते
महफ़ूज तो थे।

विकल्प

जिन्दगी
जब कोई विकल्प नहीं देती
तो जीना एक मात्र विकल्प होता है
आसान हो या कठिन
इससे कोई फ़र्क नहीं पडता
जब हम
जिंदगी से बढ कर
स्वयं को समझने लगते हैं
तब ढेरों विकल्प पैदा करते हैं
विकल्प पैदा करने के प्रक्रिया
ध्रुव सत्य को चुनौते देती है
वह ऊर्जा जो
ध्रुव सत्य के पोषण में खर्च होती
उससे संघर्ष में स्वाहा हो जाती है।
आदमीं हर बार जीतता नहीं है
मौत किसी एक दिन सो जाने का नाम नहीं है
वह जो विकल्प पैदा करके भी
अपनी लिखी हुई तकदीर से हारता है
घुटन में जीता है और
मौत को बेहतर पहचान देता है
कोंने दर कोंने
घिरता हुआ अंधेरा
उसके खोजे हुये विकल्प का विकल्प बन
उसकी चुनौती तोड देता है
और उस अंधेरे में
शांत जिन्दगी
विकल्प हींन बन
फ़िर जीत जाती है।

 


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