सुरेश सेन निशांत
सुरेश सेन निशांत, हिमाचल प्रदेश के युवा कवि हैं। कृत्या को हिमाचल प्रदेश से बेहद खूबसूरत कविताएँ मिली हैं। सुरेश सेन इसी श्रंखला की एक कड़ी हैं। सुरेश की कविताओं में वही आक्रोश है जो बड़े शहरों में रहने वाले कवियों में बुझता जा रहा है। सुरेश का पता है --‍गाँव सलाह, डा सुन्दर नगर, जिला मण्डी, हिमाचल प्रदेश 174401

माँ की कोख से

माँ की कोख में
हिलता बच्चा
एक खिलता हुआ फूल
याद आता है माँ को
माँ की कोख में
हिलता है बच्चा।

आसमान में उड़ती चिड़िया पे
बहुत प्यार आता है माँ को।

माँ की कोख में
हिलता है बच्चा

मछली सी तैरती जाती है
ख्यालों के समन्दर में माँ
अपने बच्चे के संग संग

माँ की कोख में
हिलता बच्चा
सैंकड़ों फूल की खुशबू
हजारों पेड़ों का हरापन
अनन्त झरनों का पानी
अपने आँचल में
उड़ेल देती है माँ
जिन्दगी के सीने पे

माँ की कोख में
हिलता है बच्चा
पृथ्वी के सीने में भी
उतर आता है दूध
फैल जाता है हरापन
खलते हैं फूल
निखरती है खुशी।

अच्छे भाग वाला मैं

अच्छे भाग वाला हूँ मैं
इतना बारूद फटने के बाद भी
खिल रहे हैं फूल
चहचहा रही हैं चिड़ियाँ
बचा है धरती पर हरापन
सौंधी खुशबू

अभी भी नुक्कड़ों पे
खेले जा रहे हैं ऐसे नाटक
कि उड़ जाती है तानाशाह की नीन्द

बचा है हौंसला
आतताइयों से लड़ने का
इतने खौफ के बावजूद भी
गूंगे नहीं हुए हैं लोग

बहुत भागवाला हूँ मैं
बाजारवाद के इस शोर में भी
कम नहीं हुआ है भरोसा दोस्त
कवियों का
जीवन पर से

अभी भी
उन लोगों के पास
दूजों का दुख सुनने के लिए
है ढेर सारा वक्त

अभी भी है
उनके दिल की झोली में
सान्त्वना के मीठे बोल
द्रवित होने के लिए
बचे हैं आँसू
कुंद नहीं हुई है
इस जीवन की धार
बहुत खुशकिस्मत हूँ मैं
हवा नहीं बन्धी है
किसी जाति से
और पानी धर्म से
चिड़िया अभी भी
हिन्दुओं के आंगन से उड़ कर
बैठ जाती है मुसलमानों की अटारी पे

उसकी चहचहाहट में
उसकी खुशियों भरी भाषा में
कहीं कोई फर्क नहीं

अच्छे भाग वाला हूँ मैं
अभी भी लिखी जा रही है
अन्धेरे के विरुद्ध कविताएँ
अभी भी
मेरे पड़ोसी देश में
अफजाल अहमद जैसे रहते हैं कई कवि

 

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