सुदर्शन वशिष्ठ


सुदर्शन वशिष्ठ हिमाचल के प्रसिद्ध कथाकार, कवि हैं। आप हिमाचल से निकलने वाली  "सोमसी" नामक पत्रिका के सम्पादक, तथा "भाषा संस्कृति अकादमी"  के सचिव हैं।


रसोईघर में औरतें

यह कविता उनके नाम जो रहतीं हैं रसोई में
रसोई ‌और घर के दो चार कमरे
या बहुत हुआ तो आँगन
ही है उनका संसार

माँ करती बेटे का इंतजार
पत्नी पति का, भाई का बहन
दहलीज लाँघना है
उनके लिए पहाड़, लांघना

डरते हुए पूछती सब्जी का स्वाद
नमक कम तो नहीं
मिर्च ज्यादा तो नही
वे खाना नहीं प्यार परोसती हैं
जो खाते हैं नमक
नमक हरामी करते हैं

उन्हें नहीं कुछ लेना- देना
सुबह उठते ही जुट जाती रसोई में
रात गहराते तक रहना है
वहीं बतियाना है सुस्ताना है
हँसना है रोना है
निढाल होना है
तभी रसोई को रसोई घर क
ते हैं

उन्हें नहीं मालूम
कोई बाहर कर रहा इंतजार
उनके लिए आरक्षित हैं सीटें बसों में
सभाओं विधानसभाओं में
वे बन सकती हैं माडल विश्वसुन्दरियाँ
वे बन सकती हैं मन्त्री प्रधानमन्त्री
 


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