रमेश मेहता की कविताएँ


रमेश मेहता की कविताओं में समाज के रूबरू होकर सवाल रखने की हिम्मत और कोशिश है जो उन्हें समकालिकता के दायरे में रखती है। आपका पता हैः--235, Rehari, Jammu


विद्रोह

पैरों के नीचे दबा
कसमसाता रहा
रास्ता
उसे अधिकार नहीं था
बटोही चुनने का
हाथों के बीच
मसली जाती
कसमसाती रही तितली
उसने नहीं सीखा था
डँसना

पत्थर पर लगातार
घिसते चले जाने से
ऊब गया चन्दन
बन गया आग
 


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