एक खिड़की - चार सलाखें

5-
टिन की छतें
बोरी की दीवारे
आँगन -
कितना विशाल!
बच्चे को नहाने के लिए
औरतों को बतियाने के लिए
कपड़े सुखाने के लिए
रेल की पटरियाँ जो हैं
6-
इमारतों को रास नहीं आता
पटरियों का खाँसना
इंजन का चीखना
लोहे की रगड़
गंदगियाँ,
यह तो बस कोठरियों का जिगर है कि
हिलक कर मिलती है
पटरियों से
पहियों की चक्कर-चूँ में
जी लेती हैं तमाम यात्राएँ
एक साथ
7-
कौओं में इतनी शराफत कहाँ कि
गूटरगूँ करते रहें
घंटाघर के एन ऊपर
गन्दगी की बौछारों के साथ
वे चले आते हैं पटरियों पर
दावत उड़ाते हैं
खिड़की से फैंकी
झूठी तश्तरियों पर
कौओ को विश्वास है
सफाई में
8-
बड़ा पत्ता हरा
छोटी पत्ती हरी
नन्हीं कोंपल
हरी
पौधा हरा
दरख्त, लता
हरे
हल्का हरा,
गहरा हरा
मध्यम हरा
एक चटख लाल
फूल ने गर्दन निकाल कर झाँका
हरा तिलस्म
भरभराकर फूट गया

9-
दुपहरी चली आई भीतर
खिड़की के
जमी बैठी रही
सीखंचों पर
जब तक कि
साँझ ने तामझाम नहीं फैलाया
रात होते ही
समूचा समन्दर रेल आया
खिड़की के भीतर
10-
पेरियार का रंग
लाल हो गया है
इतना लाल कि
डुबकी मारते
ही कपड़ा
बन जाता है
झण्डा
तन जाता है
बात-बेबात पर
रंग लाल हो या सफेद
या फिर भगुवा
झण्डा उठाया जाता है
हमेशा
काम रोकने के लिए
वे, जो पनाह नहीं लेते
किसी भी रंग की
पलायन कर जाते हैं
रेत के समन्दर में
11-
बादल, बगीचे, और
केलों के गाछ
सब एक गुजर गए
मुझे,
याद आती है
उसके कमरे में फैली बेतरतीब
किताबों की विकट खुशबू
उसके बदन की खुशबू से कहीं ज्यादा
मैं परेशान हो उठती हूँ
न जाने क्यों?
12-
इस वक्त मेरे पास
एक खिड़की है,
एक यात्रा है
बालों को सहलाने के लिए
हवा भी
फिर भी मैं याद कर रही हूँ
डा जानाज कोर्जाक* को
जो जा रहे थे
गाते-गाते
नाजियों के गैस चैम्बर की ओर

अनाथ बच्चों को लिए साथ
इस वक्त मेरे पास
एक खिड़की है,
एक यात्रा है
*डा जानाज कोर्जाक नाजी राज्य के वक्त
वारशाँ में यहूदी अनाथालय के डायरेक्टर थे। जिन्हें जब बच्चों के
साथ गैस चैम्बर में जाने का हुक्म मिला तो वे गीत जाते हुए चलते
चले गए
।
उनके गीतों ने बच्चों के खौफ को कुछ हद तक कम किया होगा।
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