राजेश जोशी की कविताएँ


राजेश जोशी - समकालीन कविता के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर । समर गाथा एक लम्बी कविता और चार कविता संग्रह - एक दिन पेड़ बोलेंगे, मिट्टी का चेहरा. नेपथ्य में हँसी, दो पंक्तियों के बीच । दो कहानी संग्रह - सोमवार और अन्य कहानियाँ, कपिल का पेड़ । तीन नाटक - जादू जंगल, अच्छे आदमी, टंकारा का गाना । मायकोवस्की की कविताओं का अनुवाद । आलोचनात्मक टिप्पणियों की किताब - एक कवि की नोटबुक । कविताओं के भारतीय और विदेशी भाषाओं में अनुवाद । शमशेर सम्मान, पहल सम्मान, शिखर सम्मान के साथ केन्द्र साहित्य अकादमी के प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित ।

माँ कहती है

हम हर रात
पैर धोकर सोते है
करवट होकर।
छाती पर हाथ बाँधकर
चित्त
हम कभी नहीं सोते।

सोने से पहले
माँ
टुइयाँ के तकिये के नीचे
सरौता रख देती है
बिला नागा
माँ कहती है
डरावने सपने इससे
डर जाते है।

दिन भर
फिरकनी सी खटती
माँ
हमारे सपनों के लिए
कितनी चिन्तित है!

चिड़िया

उजली धूप में
पानी बरस रहा है
"चिड़िया का ब्याह हो रहा होगा"
कहती है मुनिया।

कहती है मुनिया।
चिड़िया का एक पंख
धूप है
एक पंख
पानी।

चोंच में
जो दाना है
वह दाना
दाना पानी भी भी है
‌और आकाश भी।

पेड़ क्या करता है

माँ कहती है
पेड़ रात में सोते हैं

तो पेड़
क्या करता है दिन भर?

हम्माल
हम्माली करता है
मजूर
मजूरी अफसर
अफसरी करता है
बाबू बाबूगिरी

और
रात को थक कर सोता है
‌और पेड़

पेड़ क्या करता है दिन-भर?
 


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