लाल्टू  की कविताएँ


नौंवे दशक के उत्तरार्द्ध में उभरे युवा कवियों में लाल्टू का नाम अग्रणी है। व्यक्तिगत और सामाजिक संघर्षों में निरन्तर मानदण्डों की स्थापना करते हुए अभिव्यक्ति को संवेदना का स्वर देने वाले प्रमुख कवि हैं। प्रस्तुत कविताएँ उनके कविता संग्रह - "एक झील थी बर्फ की" से ली गईं हैं।

वह भी कह गई थी

वह भी कह गई थी
दो एक कठिन अंग्रेजी शब्दों से
परख लिया था उसने मुझे
फिर कह गई
खत लिखेगी

छोटी सी बात
उसका कहना
सुबह शाम
हँसना रोना लड़ना खेलना
जैसी छोटी सी घटना

फिर भी सोचता हूँ
वह कह गई
पर अभी तक नहीं लिखा।

सेंध

तुम्हारे इंतजार में
सुबह गई
शाम गई

थकी रीढ़
थक गई आँखे

तुम आईं
साथ लाईं
एक लम्बी मोटी दीवार

आशा कुरेदने लगी है
दीवार को
कहीं धोखे से
लगा रखि हो तुमने सेंध कहीं।

जब तुम नहीं रहतीं

ठहर जाता है
विश्व एक बिन्दु पर
जब तुम नहीं रहतीं

रह रहकर
नशे में उठ पड़ता हूँ
जैसे तुम्हारी बाहैं
हवा में बहती
आ रही हों मेरी ओर

तुम्हारी जीभ, तुम्हारे वक्ष
नितम्ब तुम्हारे मुड़ मुड़
आते हैं हथेलियों पर

देखता रहता हूँ
अपनी उंगलियों को
जैसे तुमने परखा था उन्हें


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