नाजिर कुबानी

"चिड़िया घोंसलें की ओर लौटती है और बच्चा लौटता है माँ के स्तनों मे ,"
नाजिर कुबानी प्रसिद्ध अरबी शायर हैं, जो अपनी बेबाकी और शायरी दोनों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। आपसे पहले अरबी शायरी में पारम्परिक भाषा का निर्वाह हुआ करता था। आपने अपनी शायरी में रोजमर्रा की भाषा को  जगह दी। इस तरह शायरी को आम आदमी के करीब ले आए। वे उन लोगों में भी प्रसिद्ध हुए जिनका शायरी से कोई नाता ही ही नहीं था। प्रस्तु अनुवाद आपकी शायरी के अंग्रेजी अनुवाद से कृत्या के लिए संपादक द्वारा किए गए हैं।

मुकाबला

मेरा मुकाबला नहीं तुम्हारे दूसरे
आशिक से , माशूका!
वह तुम्हे यदि बादल देगा,
मैं तुम्हे दूँगा बरसात
वह तुम्हे गर लालटेन देगा
मैं दूँगा तुम्हें चाँद
वह तुम्हे गर टहनी देगा
मैं दूँगा तुम्हें दरख्त
दूसरा गर तुम्हे जहाज देगा
मैं दूँगा तुम्हे एक भरापूरा सफर

मुहब्बत

जब मैं करता हूँ मुहब्बत तो
होता हूँ सारे जहाँ का बादशाह
तमाम दुनिया पार राज करते हुए
सूरज की ओर बढ़ता हूँ घोड़े पर सवार
मुहब्बत में बन जाता हूँ पिघली रोशनी
जो दिखाई न दे आँखों से
मेरी डायरी में लिखी गजले
बदल जाती हैं अफीम के खेतों में
जब मैं मुहब्बत में हूँ  , तो
उंगलियों से पानी बहता है
जबान पर घास उगती है
जब मै हूँ मुहब्बत में तो
सारे वक्त को पार कर
बन जाता हूँ खुद वक्त
जब मैं मुहब्बत करता हूँ औरत से तो
सारे दरख्त भागते हैं मेरे पीछे नंगे पाँव

समन्दर में

आखिरकार मुहब्बत हो गई
हम आ पहुँचे खुदा की जन्नत में
पानी के नीचे से तैरते हुए
मछली की तरह समन्दर के
बेशकीमती मोतियों को देख
अचम्भित होते रहे
आखिरकार मुहब्बत हो गई
बिना किसी डर के, पूरी शिद्दत के साथ
‌और हम साफ थे
इतनी आसानी से हुआ कि
जैसे कि चमेली के पानी से लिखा हो
जैसे कि पानी का दरिया बहा हो

मैंने लफ्जों से जीत लिया दुनिया को

मैंने लफ्जों से जीत लिया दुनिया को
जीत लिया अपनी मादर जबान को
संज्ञा, सर्वनाम , बाक्य न्यास
मैंने शुरुआत की
जिसमें पानी का संगीत और आग का सन्देश है
मैंने आने वाले वक्त के लिए रोशनी रखी
वक्त को तुम्हारी आँखों में रोक दिया
उस लकीर को ही मिटा दिया
जो एक लम्हे के लिए भी वक्त को दूर करे

संवाद

मत कहों कि मेरी मुहब्बत
अंगूठी या कंगन थी
मेरी मुहब्बत रुकावट थी
जबरदस्त और घमासान
जो मौत की ओर तैरती चली गई
मत कहों कि मेरी मुहब्बत चाँद थी
वह तो चिनगारियों का पुंज थी
 


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