पिछले कुछ महिनों ने कृत्या का आकार सिकुड़ता जा रहा है, इसके पीछे कोई और कारण नहीं, बल्कि एक बड़े आयोजन की तैयारी के कारण समय की कमी की विवशता है। कृत्या के कवितोत्सव की हम घोषणा कर ही चुके हैं। अब हम उसके काफी करीब पहुँच चुके हैं, और हमारी व्यस्तता बढ़ती जारही है। सामान्यतया हम सोचते हैं कि आज के जमाने में कविता की जिन्दगी में कोई जगह ही नहीं, किन्तु इस काव्योत्सव में अन्य लोगों का सहयोग देख कर हमें ऐसा नहीं रहा है।
देश- विदेश के अनेक कवि अपने खर्चे से इस उत्सव में जिस उत्साह से भाग लेने आ रहे हैं, वह कविता की शक्ति में हमारे विश्वास को दृढ़ करने के लिए पर्याप्त है। न जाने कितने मित्रों ने हमें मदद दी। समीर लाल, सुमा वी एस ने विदेश से आर्थिक मदद भेजी तो सुमन कुमार घई जी ने उत्सव को हिन्दी में प्रस्तुत करवाते हुए अपनी पत्रिका में स्थान दिया। इसी तरह न जाने कितने जाने- अनजाने मित्र कृत्या के कवितोत्सव में भागीदार बन गए हैं। अतः मुझे लगने लगा है कि यह उत्सव कृत्या का नहीं बल्कि हम सब कविता से स्नेह रखने वालों का है।
यहीं विश्वास इस अति व्यस्त , बेहद थका देने वाले वक्त में भी मुझे शक्ति दे रहा है।
मित्रों हम कवितोत्सव के उपरान्त फिर से हम फिर से कृत्या के पूरी क्षमता के साथ प्रस्तुत करेंगे, और काव्योत्सव की झाँकियाँ भी प्रस्तुत करेंगे। कृत्या उत्सव के बारे में सुमन घई जी टिप्पणी इतना कुछ कह जाती है कि मुझे से अलग से कुछ कहने की जरूरत ही नहीं। कृत्या के पाठकों से निवेदन है कि घई जी की टिप्पणी को अवश्य पढ़ें‍ http://www.sahityakunj.net/SAMACHAR/India/kritya_2007.htm

मित्रों! आप सब के सहयोग की कामना करते हुए हम कृत्या के कवितोत्सव में आप सब को आमन्त्रित करते हैं

रति सक्सेना

काव्योत्सव के लिए कृपया निम्नलिखित लिंक देखें


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