
कृत्या प्रकाशन की पुस्तकें
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अगले दिन तक सभी विदा हो चुके थे.. बस हम बचे थे, कृत्या के
ट्रस्टी और सहायक... रीते तम्बुओं उखाड़ते.. पैसा चुकाते हु॓ए...
मन अजीब सा भारी था, तीन दिनों में ही जो प्यार मिला, वह संभाला
नहीं जा रहा था, जो अवसाद मिला वह भी मन रीता कर रहा था... स्थानीय
लोगों में कुछ ने मुँह बिचकाया, तो लगा कि कृत्या कुछ नया जरर कर
गई है जो लोगों को स्वीकार नहीं हो पा रहा है। मित्रों के मेल आने
लगे.. सबी यादों को चुभला रहे थे,
आज जब मैं इन यादों को बटोरने बैठी हूँ तो कोशिश करके भी उन यादों
को भुला नहीं पा रही हूँ... आशा यही है कि हम फिर मिलेंगे.. अगले
काव्योत्सव में ... भारत के किसी राज्य मे..
रति सक्सेना
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मनुष्य ने आँखें खोली
तो उसे सबसे पहले
नीला फैला हुआ
आसमान दिखा....।
उड़ना सीखी चिड़ियाँ
तो फड़फड़ाते हुए
उसने पुकारा
आसमान को।
रजत कृष्ण
ये हैं कवि
शब्दकोष की पहाड़ी को बढ़ाते हुए
संक्षिप्त आक्सफोर्ट डिक्शनरी के
दो सम्पूर्ण खण्डों के बीच
पनिहारिन की तरह सन्तुलन बनाते हुए
Gerry Murphy
उस दिन मुँह सवेरे जब मैं चट्टान के सिरे पर
खुरदुरी सतह पर पाँव जमाए खड़ा था
एक सफेद कनखजूरा सरसराता निकला , नंगे पैरों से
कोई चट्टानी सिरा नहीं वाले दौड़ के खेल में
एक नन्हा बच्चा नंगे पाँव चलता धीमे से आया
अपना हाथ बढ़ा कर मुझसे थामने को कहाताए
हो हान
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सच
है। मैं इसे जरूरी समझता हूँ। मैं एक क्रांकीट बात अंग्रेजी की
रखता हूँ। हम सभी चिन्तित हैं कि अंग्रेजी ने हिन्दी का स्थान ले
लिया। अंग्रेज चिन्तित नहीं हैं कि भारतीय लेखकों ने अंग्रेजी पर
कब्जा कर लिया या कहें एशियाइओं ने। बताइए आज मूल अंग्रेजी
बोलनेवाले मेजॉरिटी में हैं या वो जिनकी मूल भाषा अंग्रेजी नहीं।
हम सोचते हैं, हमारी कविताओं के अच्छे अनुवाद अंग्रेजी कर सकते
हैं। अनुवादों में यह निर्भरता क्यों? हमें आत्मनिर्भर होना पड़ेगा।
आज अंग्रेजी के पाठक एशिया में बहुत हैं। हमें उनकी (अंग्रेजी) तरफ
देखने की जरूरत नहीं। ग्लोबल इम्पैक्टस को हमें सशक्त राष्ट्र के
रूप में देखना होगा। अगर हम एक पूर्व गुलाम की तरह सोचेंगे तो उसकी
छाया जीवन और साहित्य दोनों जगह दिखेगी। वह वर्तमान बोध को दूषित
करेगी। उस छाया से निकलकर खुले ढंग से और बदले माहौल में हमें
सोचना पड़ेगा तभी समकालीन कविता की मानसिकता पर अपेक्षित प्रभाव
पड़ेगा और नए परिणाम आएंगे।
'कुंवरनारायण
से लीलाधर मण्डलोई की बातचीत ....और »
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मेरे भीतर एक सितारा था
पहले,जब मैंने चीजों के बारे में तकनीकि तरीके सोचना सीखा
मेरी पूरी देह तड़प उठी,कोई सन्देह नहीं,
यह वह सितारा था याद दिला रहा था मुझे चीजों के बारे में
उससे पहले,कि वे भीतर घुसें ये चीख उठा
Yasunori Matogawa (Director, JAXA Space Education Center)
2
जल थरथराता है सितारे में
जल थामता है रोशनी
रोशनी मानव दिल हैं।
Makoto Ooka (poet)
रोशनी का एक पथ मेरा अनुकरण करता है
हर कदम कई रोशनी वर्ष एक दूसरे के बाद
शायद मैं इस यात्रा के योग्य हूँ
Wry Welwood (Intensive Clinical Manager, age 55, USA)
JAXA
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मानव की जाति है मानवता,
जैसे गायों की जाति है गोत्व।
ब्राह्मण आदि उसकी जाति नहीं,
हाय! न जाने कोई तत्त्व यही।
एक जाति, एक धर्म,
एक ईश्वर मानव का,
एक योनि, एक आकार,
नहीं कोई भेद इसमें।
एक ही नर जाति से,
निकलती है नर सन्तति,
नर की, ऐसा सोचें तो,
है मात्र एक ही जाति।
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ज्ञान में बसकर, ज्ञानी के अन्दर बाहर,
सभी जगह एक समान प्रोज्वलित,
महा सत्ता को, पंचेन्द्रिय का कर दमन,
बार बार कर प्रणाम, करें निवेदन।
2
अन्तःकरण, इन्द्रिय और धड़ से लेकर,
जितने भी जो ज्ञात जगत् हैं अनेक,
परा ज्योति से उदित भानु का,
तनु मात्र है वह सब, इसे जान लें।
सन्तगुरु नारायण
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