












कृत्या प्रकाशन की पुस्तकें
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' राइनेर
मारिया रिल्के के किसी गद्य से उद्धृतः अनुवाद राजी सेठ
एक अच्छी कविता लिखने के लिए
".....कविता मात्र आवेग नहीं अनुभव है। एक अच्छी कविता लिखने के
लिए तुम्हें बहुत से नगर और नागरिक वस्तुएँ देखनी जाननी चाहिए।
बहुत से पशु पक्षियों के उड़ने का ढब। नन्हे फूलो के किसी कोरे
प्रात में खिलने की मुद्रा। अज्ञात प्रदेशों और अनजानी सड़कों को
पलटकर देखने का स्वाद। औचक के मिलन । कब से प्रस्तावित बिछोह। बचपन
के निपट अजाने दिनों के अनबूझे रहस्य।माता-पिता, जिन्हे आहत करना पड़ा
था, क्यों कि उनके जुटाए सुख उस घड़ी आत्मसात नहीं हो पाए थे। आमूल
बदल देने वालीं छुटपन की रुग्णताएँ। खमोश कमरों में दुबके दिन।
समुद्र की प्रात। समुद्र खुद। सब समुद्र सितारों से होड़ लगातीं
यात्रा की गतिवान रातें।
नहीं इतना भर नहीं। उद्दाम रातों की नेह भरी स्मृतियाँ... प्रसव
में छटपटाती औरत की चीखें। पीला आलोक। निद्रा में उभरती सद्यः
प्रसूता।
मरणासन्न के सिरहाने ठिठकें क्षण। मृतक के साथ खुली खिड़की
वाले कमरे में गुजारी रात्रि और छिटका शोर।
नहीं, इन सब यादों में तिर जाना काफी नहीं। तुम्हें और भी कुछ
चाहिए-इस स्मृति संपदा को भुला देने का बल। इनके लौटने को देखने का
अनन्त धीरज। जानते हुए कि इस बार जब वे आएँगी तो यादें नहीं होंगी।
जो अचानक अनूठे शब्दों में फूट कर , किसी भी घड़ी बोल देना चाहेंगी
अपने-आप को।"
रिल्के के पत्रो के कुछ अंशः
"अपने आन्तरिक एकान्त को तुम्हें इस बात से दूभर नहीं बनाना चाहिए
कि तुम्हारे भीतर का कुछ बाहर आ जाने को लालायित है। यदि तुम
शान्ति से स्थिरता पूर्वक विचार करो तो यही इच्छा दूर- दूर तक
तुम्हारे एकान्त का विस्तार करने का माध्यम बनेगी।
ज्यादातर लोग अपने समाधान पाने के लिए सुगम से सुगमतर रास्तों की
ओर उन्मुख होते हैं, पर हमारी आस्था दुर्गम के पक्ष में होनी
चाहिए, क्यों कि प्राणवन्त चीजें एक इसी तर्ज पर चलती हैं। प्रकृति
जगत में हर चीज विकसती है, अपनी रक्षा भी करती है, और हर तरह का
विरोध सहने के बाद अपने स्वत्व में भी बनी रहती है। हमारा ज्ञान
सीमित जरूर है, पर यह बात अटल है कि जो कुछ कठिन है हमारे साथ बना
रहता है, हमारा परित्याग नहीं करता। अकेला होना अच्छा सी क्योंकि
एकान्त दुस्साध्य है, और जो कुछ दुस्साध्य है , हमारे लिए इच्छित
है।

"प्रेम में होना अच्छी बात है, क्यों कि प्रेम दुर्गम है। एक
मनुष्य दूसरे मनुष्य को प्यार कर सके, यह संभवतः सबसे कठिन काम है,
जो हम लोगो के जिम्मे है-एकदम आधारभूत काम-अन्तिम प्रमाण और
परीक्षा,बाकी सब कुछ तो वहाँ पहुँचने की तैयारी है। .............
"प्यार का अर्थ घुल जाना, समर्पण कर देना या बंध जाना नहीं है (उस
सम्मिलन ला क्या अर्थ जिसमें दो व्यक्ति, अस्पष्ट, अपरिष्कृत और
असंबद्ध बनेरहते हों) बल्कि यह परिपक्व होने की ओर प्रस्थान है,
अपने स्वत्व में कुछ होने का, एक संसार बन जाने का , दूसरे के
निमित्त अपने भीतर एक पूरा संसार समेट लेने का। यह बहुत बड़ी बात है
कि प्रेम प्रस्फुटन के लिए एक उसी व्यक्ति पर अपना दावारख रहा है,
और बड़े विस्तारों के लिए एक उसी व्यक्ति को चुन और टेर रहा है।"" प्रश्नों
को ऐसे प्यार करो जैसे कि वे बन्द कमरे में बन्द हो या
विदेशी लिपि में लिखी गयी पुस्तकें। उत्तर मत ढूँढों, क्यों कि वह
तुम्हें फुलहाल मिल ही नहीं सकते, अभी
तुम उन्हें झेल ही नहीं सकते।
असली सवाल तो
हर
अनुभव को जीने का है। अभी तुम प्रश्नों को जियो तब
शायद आगे कभी भविष्य में,
तुम्हारा जीवन धीरे-धीरे अचेत ही
उन
उत्तरों के बीच रचने- बसने लगेगा। रचने और निर्माण करने की
संभावनाएँ तुम्हारे भीतर हैं, जो कि एक शुभ और सात्विक रास्ता है।
"
रिल्के के पत्र युवा कवि के नाम
राइनेर मारिया रिल्के(जन्म प्राग,1875-1926)जिनका अवतरण पश्चिमी
यूरोप में प्रकृति की एक अभूतपूर्व घटना की तरह माना जाता है। कुल
मिला कर
30
कविता संग्रह, कहानियाँ, समीक्षा, संस्मरण, लेख और उपन्यास की रचना
की।

एक बैचेन यायावर, जागरुक एकान्त की तलाश में कविताओं और यात्राओं
के बीच डोलती जिन्दगी। चिन्तन शील प्रज्ञा। मनुष्य की नियति से
जुड़े सरोकार। प्रश्नाकुल एकाग्रता। नीत्शे से वैचारिक निकटता।
तालस्ताय पास्तरनाक से सम्पर्क। रोंदा जैसे शिल्पी से संसर्ग।
राजी सेठ
कथाकार, कवि और अनुवादिका। समकालीन हिन्दी साहित्य में एक
महत्वपूर्ण हस्ताक्षर।
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