सारा शगुफ्ता


सारा शगुफ्ता की कविता खून से लिखी इबारत है। पाकिस्तान की शायरा सारा ने शायरी के अन्दाज को नजरअन्दाज करते हुए एक ऐसी जबान में शायरी लिखी जो आम औरत के दर्द से लिकी जाती है। उनकी संवेदनशीलता और बेबाकी आज भी हमें काफी कुछ सिखा जाती हैं।

मौत की तलाशी मत लो

बादलों में ही मेरी तो बारिश मर गई
अभी अभी बहुत खुश लिबास था वो
मेरी खता कर बैठा...
कोई जाए तो चली जाऊँ
कोई आए तो रुखसत हो जाऊँ
मेरे हाथों में कोई दिल मर गया है
मौत की तलाशी मत लो
इंसान से पहले मौत जिन्दा थी
टूटने वाले जमीन पर रह गए
मैं पेड़ से गिरा साया हूँ
आवाज से पहले घट नहीं सकती
मेरी आँखों में कोई दिल मर गया है.....

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