सुशील कुमार


परिचय के लिए देखिये - सुशील कुमार

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डैश पर टांगें फैलाये बैठा
पूरे तंत्र का तमाशागर यह जीव
जनता की बोटियों के खुराक पर
जिन्दा रहता है
लूटता है उनके वोटों को
घुस आता है सरकार की धमनियों में
वायरस बनकर और
डैश को लंबा करने की
हर मिनट
बहत्तर शातिर चालें चलता है ।

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जज़्ब हो जाना चाहता है
जनता के वीर्य में कोख़ में
अपने जैसे संततियों की
पंक्तियां खड़ी करना चाहता है
जनतंत्र के पथ पर
और बचाये रखना चाहता है हर हाल में
डैश का बजूद ।

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जनता की नींद में
वर्दियों के घेरे में
तमंचों के साये में
कानून की आड़ में
अब पूरे सूरक्षित हो गया है वह ।

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जनता तो
मालगोदामों में एक पर एक लदी
चुप्पियों से भरी बोरियों का
जैसे छतें छूती असंख्य ढ़ेर हैं
जिस पर तंत्र का कड़ा पहरा है
और हिलना - डुलना मना है ।

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सरकार से बंधी उसकी आशाएं
सड़कों पर धूल चाट रही हैं
अपनी ही भीड़ के रेल-पेल में
मंचासीन दुभाषिये आदमीनुमा जीव के
कनफोड़ भाषणों की गहमागहमी के बीच
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बदलाव की उम्मीद में
जनता बेसब्री से
उलटती है सुबह की अखबारें
पर हिंस्त्र जानवरों के बढ रहे नाखून
की खबरें अहसास दिलाती है उसे
जन और तंत्र के मध्य हर दिन
(लंबे) खींच रहे डैश का ।


--सुशील कुमार
हंस निवास, कालीमंडा.हरनाकुंडी रोड
पो-पुराना दुमका, दुमका, झारखंड ।
मो-0 94313 10216


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