कृत्या प्रकाशन की  पुस्तकें
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शब्द मर जाते है
मुँह से निकलते ही
कुछ लोग कहते हैं
लेकिन
जिन्दगी शुरु होती है
उसी दिन उनकी
मेरा कहना है

इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण कवयित्री एमिली डिकेन्सन ने शब्द के बारे में लिखा है। उनका सवाल यह है यदी शब्द इतने शक्तिहीन या मर्त्य हैं तो उनसे कविता कैसे प्रस्फुटित हो सकती है , क्यों कि कविता स्वयं में जिन्दगी है। वैदिक दर्शन शब्द को ब्रह्म मानते हुए कवि को ब्रह्मा का दर्जा देता है। कवि सृष्टा है तो कविता सृष्टि। पुनः सवाल यह उठता है कि यदि क्या शब्द अपनी शक्ति खो सकता है? क्यों कि व्यवहार में हम देखते हैं कि सभी शब्द प्रभावशाली नहीं होते, और कविता के नाम पर लिखी गई हर पंक्ति कविता नहीं होती। अब सोचने को बाध्य हैं कि क्या शब्द भी अपनी शक्ति खो सकते हैं? यदि ऐसा है तो वैदिक दर्शन से लेकर एमिली डिकेन्सन की सोच पर सवाल उठेगा।
शब्द उस पत्थर या ईंट की तरह हैं, जिनका सही चुनाव ना किया जाए, और सही तरीके से नहीं चिना जाए तो उनसे बनने वाली इमारत खण्डहर बनने में देर नहीं लगाएगी।
कविता शब्द को शक्ति में परिवर्तन करने का उपाय है।
समकालीन परिवेश में कविता के बारे में इतनी बड़ी घोषणा करने में भी संकोच होता है। आज जब क्रिकेट जैसे खेल करोड़ों में बिक रहे हैं और कविता का मौल बाजार में टके भर भी नहीं है तो हम अंधेर नगरी को भी उत्तम मानने को बाध्य हो जाते हैं। उस नगरी में कम से कम सभी का मौल तो समान था, यह नहीं कि कंकड़ हीरे के भाव और हीरा कंकड़ के मौल!
इस अंधेरतम नगरी वाले समय में कृत्या कविता और शब्दशक्ति को जगाने का सपना देख रही है। इस सपने को साकार करने में हम सभी का योगदान आवश्यक है।

इस अंक में फिर सुशील कुमार दिनकर को प्रिय कवि के रूप में लेकर उपस्थित हुए हैं, और कविता के बारे में उनका चिन्तन सतत जारी है। हम चाहते है कि पाठक इस चिन्तन में भाग लें। अग्रज कवि में हम अभी ऋतुसंहार के अनुवाद को ही पढ़ेंगे, और समकालीन कवि के रूप में नए और स्थापित कवियों को एक साथ पढ़ेंगे।
कृत्या अगले कवितोत्सव की तैयारी कर रही है, जिसमें कविता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा गोष्ठी और लघु पुस्तिका प्रकाशन जैसी योजनाएँ भी शामिल है। आप सभी के सहयोग से यह उत्सव सफल हो सकेगा।

शुभकामनाओं सहित

रति सक्सेना

गामी विश्व काव्योत्सव के लिए जानकारी प्राप्त करें:-   Kritya2008

पत्र-संपादक के नाम                                                       KRITYA2007           
 


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