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इस
अंक के साथ कृत्या के तीन वर्ष पूरे हुए। अनेक सुखद -दुखद क्षणों
के साथ यह परिक्रमा पूरी हुई। कई साथी मिले और कई बिछड़े। शुरु में
लगा कि अंग्रेजी की वनिस्पत हिन्दी पत्रिका के लिए प्रतिष्ठित कवियों
का सहयोग कम मिल रहा है, लेकिन धीरे- धीरे स्थिति बदलती जा रही है।
आज जाल जगत में अनेक हिन्दी पत्रिकाएँ दिखाई देने लगीं हैं। इनमें
से कई का स्तर काफी सराहनीय है। अतः यह भ्रान्ति मिटती जा रही है
कि जाल पत्रिकाएँ साहित्य का स्तर प्रिन्ट पत्रिकाओं की तुलना में
कम है। जब कृत्या ने जाल जगत में प्रवेश किया था तब यह भारत से
निकलने वाली अकेली जाल पत्रिका थी जिसमें हिन्दी और अंग्रेजी दोनों
भाषाओं में साहित्य की प्रस्तुति की। कृत्या ने किसी नारे को नहीं
अपनाया, ना ही किसी तरह के विज्ञापन का सहारा लिया, बस मेहनत के बल
पर लोगों के मन में बसती गई। फिर भी कृत्या उन सब की आभारी है, जिसने
किसी भी रूप में सहयोग दिया।
मित्रों इन तीन बरसों में हमने तीन काव्योत्सव सफलता पूर्वक मना
लिए और अब चौथे काव्योत्सव की तैयारी में हैं। अगला उत्सव इस वर्ष,
नवम्बर 14,15 ,16 को चण्डीगड़ में मनाया जा रहा है जिसमें हमें
वरिष्ठ कवि सुरजीत पातर जी का सहयोग मिल रहा है और साथ ही पंजाब कला
परिषद प्रमुख सहयोगी के रूप में आतिथ्य भार उठाने के लिए तैयार है।
अतः इस बार कृत्या काव्योत्सव बड़े उत्साह के साथ मनेगा, ऐसा हमारा
विश्वास है। हमारी कोशिश रहेगी कि देश और विदेश की अधिकतर भाषाओं
को काव्योत्सव में स्थान मिल सके, और नए कवियों को भी मंच मिल सके।
समय की सीमा हमारी बाध्यता है,फिर कोशिश यही रहेगी कि अधिक से अधिक
कविता का आनन्द लिया जा सके। कृत्या उत्सव की सूचना अंग्रेजी में तो उपलब्ध है,हम कोशिश करते रहेंगे कि हिन्दी पत्रिका में भी समय समय
पर सूचना दी जाती रहें। हम चाहेंगे कि काव्य प्रेमी इस बृहद उत्सव
का आनन्द लें, इस उत्सव का विस्तरित परिचय कुछ दिनों में दिया
जाएगा,हमारा उद्देश्य यह है कि हम देश विदेश की अधिक से अधिक भाषाओं
की कविताओं को मंच पर प्रस्तुत कर सकें और अन्य कलाओ के समावेश से
कविता को रेखांकित कर सकें। हमारा मानना है कि कविता केवल कागज पर
लिखी जाने वाली चन्द पंक्तियाँ नहीं हैं, बल्कि रंग, साज, शब्द और
धुन इन सभी के सहयोग से निखरने वाली अप्रतिम कलाकृति है। कृत्या
काव्योत्सव इसी सोच को आगे बढ़ाएगा। अतः आप सब का सहयोग अपेक्षित
है।
इस अंक में कुछ अच्छी कविताओं के साथ त्रिलोचन जी पर लिखे लेख को
आगे बढ़ाया गया है। कविता के बारे में हम ब्रिटेन में कविता के बारे
में पढ़ रहे हैं, आशा करेंगे कि अगले अंको में अन्य देशों में हिन्दी
कविता की स्थिति को जानेंगे। रूस अनिलजनविजय के सुझाव के अनुसार हम
ऋतु संहार के अनुवाद को जारी रख रहे हैं, इस तरह हम दो साहित्यकारों
से परिचित हो पाते हैं, कालिदास और रागेय राघव।इस अंक के चित्र भी
रांगेय राघव जी द्वारा बनाये गए हैं। कवि और चित्रकला का इससे अधिक
सुन्दर समन्वय और कहाँ हो सकता है। आशा है हमारी यात्रा काफी लम्बे
समय तक जारी रहेगी।
शुभकामनाएँ
रति सक्सेना
An
International Poetry festival -
Kritya2008
पत्र-संपादक
के नाम
kritya2007
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