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मेरी
बात
बल्जेरियन कवयित्री ब्लागा दिमित्रोवा का कहना है कि
हर कविता को ऐसे लिखो
गोया कि यह तुम्हारी आखिरी कविता है
यह सदी, जो कि प्रदूषण से भीगी है
आतंकवाद से कंपित है
उड़ती जा रही है सुपर सौनिक गति से,
अचानक चली आने वाली मौत
तुम्हारे हर शब्द को
जेल की दीवार पर टंगी
आखिरी पहचान देंगी
तुम्हे अधिकार नहीं कि मीठा झूठ बोलो
या बचकानी खिलवाड़ करो
तुम्हारे पास कोई वक्त नहीं
गलती सुधार का
हर कविता को लिखों
संक्षेप में, कठोरता से
अपने खून से
गोया कि यह आखिरी है
मेरे पास भी कुछ सवाल हैं,
क्या हमे कविता लिखनी चाहिए?
क्या कविता इस निर्दयी समय से निजाद दिला सकती है?
क्या किसी के पास कविता पढ़ने का वक्त भी है?
क्या कविता इस सुपर फास्ट संसार की गति में चल सकती है?
किन्तु जब भी मैं एक अच्छी कविता पढ़ती हूँ, अपने सारे सवाल भूल
जाती हूँ,
मुझे लगता है कि कविता जिन्दगी के लिए है, मौत के लिए नहीं!!!
कृत्या के इस अंक में विविधता को लाने का प्रयास किया गया है। इस
अंक में मेरी पसंद के रूप में इरान की नन्ही कवयित्री सौफी की
कविताओं के अनुवाद प्रस्तुत किए गए हैं। ११ बरस की सौफी की कविता
का सूफियाना अन्दाज कविता के प्रति एक अजीब सा मोह पैदा करता है
सौफी की कविताओं को पिछले अंक में अंग्रेजी में प्रस्तुत किया गया
था, इस बार उनके हिन्दी अनुवाद यह सिद्ध कर रहें हैं कि अच्छी
कविता भाषा, देश या जाति के दायरे में बन्द नहीं की जा सकती है।
जहाँ एक और प्रिय कवि के रूप में नन्ही सौफी है तो वहीं अग्रजों की
कविता पढ़ने के लिए हम सीधे वैदिक युग में चलेंगे और पढ़ेंगे "
अथर्ववेद की प्रेम कविताएँ"।
इस कविता की आलोचना के बारे में चर्चा कर रहें हैं सुप्रसिद्ध
आलोचक अरुण कुमार। निसन्देह डा अरुण कुमार जी का लेख अपनी बेबाकी
से पाठकों को आकर्षित करेगा।
समकालीन कविता के रूप में पाठकों के सामने विविधता प्रस्तुत की जा
रही है। एक ओर विजय कुमार, नरेन्द्र पुण्डरिक जैसे समकालीन कविता
में पहचान रखने वाले कवियों की कविताएँ हैं तो दूसरी ओर अभिनव
शुक्ल जैसे, नए हस्ताक्षरों को भी प्रस्तुत किया गया है। साथ में
एक पाकिस्तानी मूल के अमेरिका में बसे शायर फैजल अजीम की गजलें
निसन्देह अलग स्वाद देंगी। यद्यपि रोमन लिपि में सामग्री प्राप्त
होने और टाइपिंग की असुविधा के कारण जरा बहुत बेमजा जरुर होगा
किन्तु इस कष्ट को स्वीकारना पड़ेगा।
कृत्या अपनी उड़ान को ऊँची करना चाहती है किन्तु उसके लिए जरूरत है
कि सहृदय पाठक इससे जुड़ें।
कृत्या के हर अंक के लिए सहयोग की अपेक्षा के साथ यह अंक प्रस्तुत
है
रति सक्सेना
नोट- इस अंक के समस्त चित्र युवा कलाकार विजेन्द्र विज द्वारा बनाए
गए हैं। विजेन्द्र ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने कम समय में
अन्तराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है । विजेन्द्र ने कंप्यूटर और
डिजिटल आर्ट में भी महारत हासिल की है। विजेन्द्र की कलाकृतियाँ
अन्तर्राष्टीय स्तर पर खरीदी जाती हैं। विज के चित्रों की अनेक
प्रदर्शनियाँ हुईं हैं । विजेन्द्र में प्रतिभा और लगन के साथसाथ
नम्रता भी है जिसके के कारण कला में आगे बढ़ने की संभावना बढ़ती जाती
है । विज ने अपनी कलाकृतियाँ कृत्या को समर्पित की हैं , इनकी
बिक्री से कृत्या के रखरखाव के लिए मदद मिलेगी । जो कलाप्रेमी इन
कृतियों को खरीदना चाहते हैं वे कृत्या के संपादक से संपर्क कर
सकते हैं । विजेन्द्र से सीधा सम्पर्क करने का पता है
STUDIO VIJ'S
06, Madhuban Building, 54-55 Nehru Place
New Delhi, IN 110019
रति सक्सेना
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