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संपादक
रति सक्सेना
डा. रति सक्सेना कवि, आलोचक, अनुवादक और
वेद शोधिका है । हिन्दी में तीन ( माया
महा ठगिनी, अजन्मी कविता की कोख से जन्मी कविता,
और सपने देखता समुद्र ), अंग्रेजी में
एक और मलयालम में एक ( अनुदित
) कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं
। वेदों को आधार बना कर
लिखे गए लेख अपने विशेष दृष्टिकोण के
कारण पठनीय रहें हैं । देश की करीब करीब सभी भाषाओं में कविताएँ
अनुदित हुईं हैं । कई कविताओं के अनुवाद अंग्रेजी में अन्य देशों की
पत्रिकाओं (वरसल -
निदरलैण्ड, एडगर - टेक्सास, गम बाल
पोयेट्री - अमेरिका आदि विदेशी
पत्रिकाओं ) में भी प्रकाशित हुए है ।
रति सक्सेना ने कविता और गद्य की नौ पुस्तकों का मलयालम से हिन्दी
में अनुवाद भी किया है जिसके लिए उन्हें वर्ष २००० में केन्द्र
साहित्य अकादमी का अवार्ड मिला । मलयालम की कवयित्री बालामणियम्मा
को केन्द्र में रख कर एक आलोचनात्मक पुस्तक लिखी
( बालामणियम्मा , काव्य कला और दर्शन । ) रति सक्सेना का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है अथर्ववेद को
आधार बना कर लिखी पुस्तक " ए सीड आफ माइण्ड -
ए फ्रेश अप्रोच टू अथर्ववेदिक स्टडी" जिसके लिए उन्हे " इन्दिरा
गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र " फेलोशिप मिली ।
कृत्या मात्र पत्रिका ही नहीं बल्कि एक संगठन है जो कविता को एक
उत्सव में परिवर्तित करने को कटिबद्ध है ।
संपादक मंडल-
अरुण कमल-
लब्धप्रसिद्ध कवि एवं आलोचक जिन्होंने वर्तमान कविता में विशेष जगह
बनाई है । आपकी कविता की चार पुस्तके है -
अपनी केवल धार, सबूत, नए इलाके, पुतली के संसार । एक आलोचना की
पुस्तक है - कविता और समय । आपकी कविताएँ
समकालीन हिन्दी साहित्य की विशिष्ट उपलब्धि मानी जाती हैं । आपको
अनेक सम्मान मिले हैं जैसे शमशेर सम्मान, सोवियत लैण्ड नेहरु
अवार्ड आदि, किन्तु सबसे महत्वपूर्ण सम्मान है
- केन्द्र साहित्य अकादमी का पुरस्कार जो आपको नए इलाके
नामक कविता की पुस्तक के लिए मिला । संपादकीय सहयोग के लिए
कृत्या आपकी आभारी है ।
अग्निशेखर-
कश्मीर के विस्थापित कवि, जो अलग रहते हुए भी कश्मीर को अपने दिल
से कभी जुदा ना कर सके, अतः कश्मीरी साहित्य को विश्व के सम्मुख
लाने मे संल्लग्न हैं । हिन्दी में तीन कविता संग्रह हैं
- किसी भी समय, मुझसे छीन ली गई मेरी नदी, कालवृक्ष की छाया
में । आतंक और आक्रमण के साये में कविता की छाँव फैलाने वाले इन कवि
का कवित्व समकालीन सन्दर्भ में विशेष सार्थक है । प्रथम अंक
में ही आपने कृत्या को विशिष्ट सामग्री उपलब्ध करवाई , इसके लिये
कृत्या आभारी है ।
कलाकार
बी डी दत्तन-
ललित कला अकादमी के सम्मानित सदस्य,मलयालम एन्साइक्लोपीडिया विभाग
के कला संपादक, केरल ललित कला अकादमी के सदस्य, १९७३ से २०००तक
अनेक एकल चित्र प्रदर्शनियाँ की । आपके चित्र नेशनल म्यूजियम,
मादर्न आर्ट गैलरी, पार्लियामेन्ट हाउस, केन्द्र ललित कला अकादमी,
श्री चित्रा आर्ट गैलरी राजभवन में आपके चित्र प्रदर्शित हैं ।
आपने कृत्या के " शुभंकर" की रचना में विशेष सहायता प्रदान की है ।
प्रभाकर
छत्तीसगढ़ के चित्रकार जिन्होंने कृत्या के लिए अनेक चित्र बनाए । इस
अंक के समस्त चित्र प्रभाकरन द्वारा बनाए गए हैं । आपके चित्र
कृत्या के हर अंक में प्रकाशित होते रहेंगे
विजेन्द्र विज
युवा कलाकार जिन्होंने कृत्या के लिए अक्षर निर्माण में और
रेखाचित्र निर्माण में योगदान दिया । |