कृत्या प्रकाशन की  पुस्तकें
कृपया लिंक देखें

 

 

कुछ दिनों पहले मैंने जम्मू में स्थित कवि मित्र अग्निशेखर को काफी लम्बे अर्से के बाद जम्मू-कश्मीर का हालचाल जानने के लिए फोन किया तो बेहद व्यस्तता के बीच उन्होंने बताया कि हाल में ही एक युवा कवि कुलदीप ने कविता पढ़ते- पढ़ते शहादत दे दी। वे लम्बे वक्त से अनशन पर थे। अनशन का सम्बन्ध व्यक्तिगत लाभ नहीं बल्कि सामाजिक भावना थी, जिसे सरकार जानबूझ कर नकार रही थी। खबर सुन कर मेरे मन में मिली-जुले विचार घमासान मचाने लगे। क्या आज के व्यापारीकरण के दौर में कोई कवि समाज या देशहित के   लिए शहादत दे सकता है? क्या इस तरह की शहादत समाज के लिए कोई अर्थ रखती है? यही नहीं, क्या आज कोई शहादत का अर्थ जानता है? या फिर कविता का महत्व पहचानता है?
आज जिस दौर से हम गुजर रहे हैं, भावनाओं का कोई महत्व रहा है?
दूसरे क्षण मुझे अजीब सी खुशी हुई कि कविता पढ़ते हुए मरना, कितनी खूबसूरत मौत है ना? अनेक घिसती रगड़ती मौतों को देखने के बाद कविता के साथ मृत्यु मुझे व्यामोहित सी कर रही है, लेकिन तुरन्त अपने को इस छद्म रोमान्टिज्म से अलग करते हुए मैंने अपना ध्यान दूसरी बातों की ओर केन्द्रित किया। इन दिनों जब केन्द्र में राजनीतिक गतिविधियाँ मजाक के तौर पर सामने आ रही थी, एक युवक को शहादत देने पर क्या मिला? प्रसिद्धी? उसके लिए तो वह जिन्दा रहा नहीं। इसका अर्थ यह था कि उसने समाज के लिए, देश के लिए बिना किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के जान दे दी। जिस कारणों से जान दी, उनकी ओर आम जनता का ध्यान भी नहीं है। इस वक्त समाज की अवस्था अफीम की पैंग में झूमते नशाखोर की तरह है जो खबरों मे चटनी-आचार खोजता है। क्या ऐसा सुप्त समाज इस शदाहत से जगेगा, लगता तो नहीं। फिर भी आग के भड़कने के लिए एक चिंगारी काफी होती है। यह सोच कर आश्वस्त हुआ जा सकता है कि आज भी कोई युवा समाज के लिए शहादत दे सकता है, आज भी कोई कविता मौत को सुन्दर बना सकती है।

इस दर्द भरे आश्वासन के साथ हम इस अंक को कवि की शहादत के नाम करते हैं, और कोशिश करेंगे कि हम उन कविताओं से भी रूबरू हो सकें जो आग पैदा करने की ताकत रखतीं हैं।

इस अंक की कलाकार हैं तेहरान की Samira Eskandarfar, जो फिल्म और कला के जगत में एक पहचान रखतीं है। रेखाचित्र कलाकार हैः‍-राधालाल वधावने, राजेन्द्र परदेशी और नागदेव ( प्रेरणा से साभार)
इस अंक में हमने पोलिश अमेरिकन कवि जान z गुजलास्वकि (John Z. Guzlowski) की कविताओं के अनुवाद प्रिय कवि के तहत प्रस्तुत किए हैं। ये कविताएँ हमें उस बेहद क्रूर संसार की ओर ले जाती हैं, जिसे हम सपने भी नहीं सोचना चाहते हैं। अग्रज कवियों की रचनाओं में पुनः ओगुरा ह्याकुनिन इश्शु कविताएँ प्रस्तुत हैं। हमे विश्वास है कि समकालीन कविता में प्रस्तुत कविताओं की विविधता पाठकों को आकर्षित करेगी।

कवि को शहादत को पुनः प्रणाम करते हुए
 

रति सक्सेना


An International Poetry festival - Kritya2008

पत्र-संपादक के नाम                             kritya2007                            
 


मेरी बात | समकालीन कविता | कविता के बारे में | मेरी पसन्द | कवि अग्रज
हमसे मिलिए | पुराने अंक | रचनाएँ भेजिए | पत्र लिखिए | मुख्य पृष्ठ