ओगुरा
ह्याकुनिन इश्शु सौ कवियों की कविताओं का संयोजन है, ये कविताएँ
वाका है। वाका पाँच पंक्तियों वाली 31अक्षरो वाली कविताएँ है जो
5-7-5-7-7 क्रम से लिखी जाती है। ये राज दरबारी कविताएँ जो हाइकू
के
उदय से पहले जापान में प्रचलित थी। इसके संयोजक तेरहवीं सदी के
फूजीवारा नौ सदाएई जो तेइका के नाम से भी जाने जाते हैं।
पिछले अंक के आगे--
मठवासी रयोसेन
अपने एकाकीपन में
मैं अपनी झोपड़ी छोड़ देता हूँ।
जब इधर-उधर देखता हूँ
सभी ओर एक जैसी ही है
एक सूनी अंधकारी पतझड़ की संध्या।
मिनामोतो नो सुनेनाबू
(1016-1097)
जब संध्या आती है,
मेरे द्वारपर थान के पत्तों से
हल्की ठक-ठक सुनाई देती है
और मेरी गोल बेंत की झोपड़ी में
आ जाती है भ्रमण करती पतझड़ी हवा।
लेडी की

प्रसिद्ध है यह लहरें
जो ताकाशी तट पर टूटती हैं
अक्खड़ शोरगुल से।
यदि मैं उस तट के समीप जाऊँ
तो केवल मेरी आस्तीनें ही भीगेंगी।
मीबू नो तदामिने
(850---)
सुबह के चन्द्रमा के जैसा
ठंडा, बेरहम था मेरा प्रेम
और जब से हम अलग हुए ,
मुझे किसी से इतनी घृणा नहीं
जितनी सूर्योदय की रोशनी से।
फूजीवारा नो मस्तसुने
(1170-1221)
योशिनो पर्वत से
बहती है ठंडी, पतझड़ी हवा।
गहरी हो रही रात में
पुराना गाँव ठिठुर रहा है
मैं सुन रहा हूँ कपड़े पटकने की आवाज।
फूजीवारा नो किन्तसुने
(1171-1244)
फूलों की बर्फ नहीं है,
जिसे उत्तेजित जंगली वायु घुमाती है
बगीचे के चारों ओर
यह जो मुरझा कर गिर रहा है
इस जगह वह मैं हूँ।
फूजीवारा नो कियोसुके
(1104-1177)
यदि मैं अधिक जीवित रहूँ
फिर शायद यह वर्तमान दिन
मेरे लिए प्रिय हो,
जैसे अतीत का दुख भरा काल
धीरे से विचारों में आ जाता है।
फूजीवारा नो तोशीनारी
(1114-1204)
मैं सोचता हूँ इस संसार से
कहीं बच निकलना संभव नही।
मैं छुपना चाहता था
पर्वतों की अत गहराइयों में
पर फिर सुनाई दी एक हिरण की पुकार।
लेडी
होरीकावा
क्या हमेशा के लिए
वह आशा करता है कि हमारा प्रेम बना रहेगा?
उसने उत्तर नहीं दिया।
और अब मेरे दिन के विचार
उलझ गए हैं मेरे काले बालों की तरह।
फूजीवारा नो सानेसादा
(1139-1191)

जब मैंने मुड़ कर देखा
उस जगह को जहाँ मैंने सुनी थी
कोयल की पुकार
मुझे एक हीवस्तु मिली
उषा काल के प्रारंभ का चन्द्रमा।
सम्राट सुतोकु
(1119-1164)
चाहे एक तीव्र धारा का प्रवाह
विभाजित हो जाता है एक चट्टान से
अपने अंधाधुंध प्रवाह में
बंट कर भी, आगे तेजी से बह कर
आखिर फिर एक हो जाता है।
प्रस्तुति और अनुवाद
अंजलि देवघर
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