कृत्या प्रकाशन की  पुस्तकें
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कविता केवल अक्षरों में ही नहीं होती है, वरन् कलाकार की तूलिका से निकली हर लकीर में, कैमरे की आँख से झाँकते हर दृष्य में और नर्तकी के घुंघुरुओं की छनक में भी कविता होती है। यही कारण है कि कृत्या उत्सव में कविता के साथ साथ अन्य कलाओं को भी रेखांकित किया जाता है। इस बार kritya 2008 के समानान्तर में एक चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी की रूपरेखा दो कलाकार युवकों ने बनाई जो कृत्या के अभिन्न अंग हैं- अमित एवं विजेन्द्र
इनके सहयोग से आरती वी कदम, Daniel Connell , दिव्या पाण्डे, कुलदीप सिंह, विजेन्द्र विज ,विशाल भरद्वाज, विजय कदम और योगेन्द्र कुमार पुरोहित ने अपनी अपनी कलाकृतियाँ प्रस्तुत की। कार्यक्रम के दौरान योगेन्द्र और डेनियल कलाकारों के रेखा चित्र भी बनाते रहे। यह प्रदर्शनी बेहद सफल रही । इसके कुछ दृश्य हैं-


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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