ओडविग क्लिवे Odveig Klyve  की कविताएँ

(नोर्वे की कवियत्री, फिल्मकार )

तुम कितनी छोटी हो
आजकल
तुम अपनी
गद्देदार कुर्सी में बैठ
दिनों का स्वागत करती हो तो
वे तुम्हारे सामने पंक्तिबद्ध खड़े हो कर
कहते हैं,
मेरी तरफ देखों
और तुम बारी- बारी से उनकी तरफ
देखती हो
और अपने दिनों को एक दूसरे वक्त की तरह
जी लेती हो
घण्टों में, मिनिटों में, पलों में
इसी तरह तुम धीरे धीरे
वक्त को मिटा देती हो।
अनुदित- रति सक्सेना

(ओडविग क्लिवे की अन्य कविताएँ)
 


मार्गस लैटिक Margus Lattik की कविता

खून

नदियाँ नदियाँ ही है
पहाड़ों पर सूरज चढ़ रहा है
तुम्हारे मिथक गीत लम्बे वक्त से
घाटियों के सीने में गूंज रहे हैं
तुम अनजानी
पूर्णतया पवित्र
शायद तुम ही थी
जिसने सूरज को गा लिया
मैंने पूरी तरह तुम्हारा अनुकरण किया
हाँ, पूरा विश्वास किया
जब तुम्हे गाते सुना तो बस
अपने खून की चाहना की।

पहाड़ पहाड़ ही हैं
नाचती नदी पर सूरज
अनदेखी खदानों के
बेहद करीब
और चमकते पत्थर
और पोस्टर के टुकड़े
मैंने वहाँ रखे,
और तुम्हारे खुरदुरे हाथों से
हटा दिया गया
मैंने जलती आँखों को देखा
वे चिल्लाए " स्वतन्त्रता"
लेकिन जो कुछ मुझे मिला

वह मेरा खून था

अनुदित- रति सक्सेना

(
Margus Lattik की अन्य कविताएँ) 


हनाने आद  Hanane Aad की कविता


आत्मबलिदान


मेरा चेहरा टूट गया है, बहुत पहले
सदियों से मैं इसके बिना रह रही हूँ
रो भी नहीं पाई, क्यों मेरी
आँखे भी फूट गई हैं
दर्पण गूंगा हो गया है
और उसके शब्दों पर ताला जड़ गया
मेरा चेहरा चूर चूर हो गया
ब्रह्माण्ड हिल गया
चेहरा बिखर गया
मेरे दिल ने बर्फ के कदमों की आहट सुनी
लेकिन स्वीकरने को तैयार नहीं हुआ
उसने कहा, तोड़ दो मुझे
उसी तरह, जिस तरह
तुमने तोड़ दिया चेहरे को
बिखेर देना मुझे
लेकिन प्रेम की किरणों की तरह
वहाँ जहाँ ठंड, अंधेरा और कुहरा है
मेरे बचे अंगो को रेत में रोप देना
और चमत्कार को गुजरने देना
मेरे अंगों को रेत में रोप देना
रेत में लिलि और चमेली खिल जाएंगे
मेरे खूंन को घाव के किनारे छिड़क देना
अपने घावों के द्वारा में मलहम बन जाऊँगी

अनुदित- रति सक्सेना

(हनाने आद की अन्य कविताएँ )
 



एवलिन होलोवे Evelyn Holloway  की कविताएँ


स्वप्न


रेल गाड़ी से केरिबियन जाना, सन्तरे के रस से भरी एक नदी

सीधी स्टील की सीढ़ी से उतरना


मेरे सिर में खाली किए गए एक बेग भर तीखे चाकू है।


मैं अपने गंज को छिपाने के लिए विग और जली भोंहो को छिपाने के लिए धूप का चश्मा पहने हूँ।


मेरी आँखे ढकीं हैं, मैने दर्पण तोड़ दिया है।

मेरे बाल काले हैं, मैंने लाल पौशाक पहनी है, मेरे होंठों के आसपास लिपस्टक चुपड़ी पड़ी है।


एक दोस्त गलियों से गुजर कर मुझसे मिलने आता है, हम कहाँ है, वियना में या फिर न्यू यार्क में? हर कुछ लाल या काला है।



कोई पीछे से आकर मुझे गले लग लेता है, मुझे मालूम नहीं कि वह कौन है, लेकिन मैं गरमाहट और अपनापन महसूस करती हूँ।



मैं दीवारों और भित्तियों के दृश्यों से गुजर रही हूँ, मैं खोजती हूँ खुला मैदान हर दीवार के बाद लेकिन वहाँ दूसरी दीवार मिलती है।

१०
मेरा फ्लैट खाली है, मैं खास -खास जगहों पर अपने को खोजती हूँ, मेरे दोस्त भी खोजते हैं, जगने पर मेरे पास कोई याद नहीं है।

११
हर्थयू रेलवे स्टेशन पर , कौन सी ट्रेन, कौन सा टर्मीनल, कहाँ जाना है, टिकट खरीदा, नहीं मिल रहा है, कहाँ हूँ मैं, कौन हो तुम, हम कहाँ जा रहे हैं।

१२
कम्बल के ढेर मेरे चेहरे पर गिर रहे हैं,

१३
मेरे चारों ओर नीलेरंग के शेड हैं, समुद्र , आसमान, सब कुछ रोशनी से नहाया हुआ है।

अनुदित- रति सक्सेना

(एवलिन होलोवे की अन्य कविता)
 


ट्रिन  Triin Soomets की कविता

चले आओ मेरी कब्र तक
इस द्वीप के किनारे पर
तट के बेहद करीब
चले आना बहते पानी के साथ
मेरी सड़ती देह को उसी के मलहम से जोड़ते हुए
कोई फर्क नहीं, मैं जिन्दा हूँ
अपने हाथों को मेरी टाँगों में से निकाल लेना
अब ये मेरी नहीं हैं
मेरे हाथ मेरे सीने पर रखे हैं
अपने विचारों को मुझसे दूर ले जाना
नहीं तो मै फिर से जिन्दा हो जाऊँगी
और हम एक दूसरे को पा लेंगे
किसी भी सदी में , किसी भी गाँव में
इस काम को जल्द निपटाओं
फिर,पूरी उम्मीद है कि हम सदियों सफर कर लेंगे
किसी तरह के निर्णय से टकराने के डर के बिना
दर्पण के अलावा।

**

अब खेलने को क्या बचा है-
कुछ भी
सफेद जूते में
लाल वाइन
पश्चिमी हवा, जहाज का मलबा
नाविकों की फूली हुई लाशे
अंध, सुदृढ़ सम्बन्ध
समुद्र कब्रगाह में घुसपैठ कर रहा है
काले बालों वाले और युवा
भूलने को क्या बचा है
कुछ भी

अनुदित- रति सक्सेना

( Triin Soomets की अन्य कविताएँ)
 


अरासिली मनसिला Araceli Mancilla की कविता

मैं, मक्का

जमीन की गहराई में
रहती हैं मेरी आत्मा , सोती हुई

सूरज के हाथ से टपक पड़ी यह
सृष्टि के आरंभ में
जो सभी जीवों का पिता है

उसकी लम्बी उंगलियाँ मुझे
सदियों सदियों तक संवारती रहीं

मैं बस एक बीज हूँ
मैने पाला है अपनी हथेलियों पर मुझे रखने वाले
औरत और आदमी के बीच प्यार

‍वे गीत रच रहे हैं
खुश हो रहे हैं

मैं बीज हूँ
मुझसे जगा है मुलायम माँस

मैं पैदा करता हूँ
मौत और जिन्दगी की रोशनी

आग शोर मचाती है
खेत उस खूबसूरती के गहरा जाते हैं
जिसे बहुत कम ही बता सकते हैं

मैंने वक्त की शुरुआत से ही
मानवता से संवाद किया है

विद्युत देव मुझे खोजने के लिए
धरती की गहराइयों को खोदते हैं

कई दन्तकथाओं से पहले एक चींटी ने
मेरा रहस्य खोल दिया


वे मेरे पास जब आए, मैं समृद्ध अंधकार में
आराम कर रही थी
आधार रहित चीजों के बीच

इसलिए मेरे उपहार को दुनिया के
चारों कोनों में बाँट दिया गया

वर्षा के राज्य में असंख्य बादलों ने
अपना काम किया

फिर ईश्वर के नाखूनों से लेकर
मेरे तक अनेक चीजे जन्मी
जिन्होंने संस्कृतियों को पाला

तली तक यात्रा शुरु करने से पहले
नग्न जलों ने मुझे वस्त्र पहनाए

हमने प्रशंसा के गीत सुने
धन्यवाद मुझे, अमरता का चक्र ज्ञात हुआ

अब मनुष्य का घर मेरा अपना है
मैंने उसके लिए बैठक बनाई, मैं
उसके समय का मापक हूँ

हमने मिल कर ब्रहाण्ड की खोज की
वही हमरा आधार था

मेरे परिधान हरे, लाल, पीले और तरह तरह के

मेरे दयालु बन्धुओं ने मेरी कब्र के आस पास
काफी कुछ उगा दिया

पूरी मानवता खुश हो गई
    
मेरे सिर को मानवता की खुशी की
मुहर बना दिया गया

हम अमरता के प्रतीक बन गए

वे खुशी के गीत गाने लगे

मैं वापिस जमीन की और लौटा
जहाँ मेरी आत्मा सो रही थी.
 

अनुदित- रति सक्सेना


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