ओडविग
क्लिवे Odveig Klyve नोर्वे की कवयित्री, और फिल्मकार हैं,
उनकी पुस्तक चाँद और धरती के बीच में नन्ही नन्ही कविता हैं जो माँ
एक बेटी के सम्बन्धों की बड़ी मधुरता से प्रस्तुत करती हैं। यह कथा
माँ के गर्भ से शुरु हो कर माँ के बेबस बुढ़ापे तक चलती है। इस अंक
में पुस्तक का आधा भाग प्रस्तुत किया गया है। बाकि कविताएँ अगले
अंक में प्रस्तुत की जाएँगी। यह अनुवाद संपादक रति सक्सेना द्वारा
केंतया के लिए किया गया है।
चाँद और धरती के बीच
1
उस वक्त
उस वक्त
तुम ब्रह्माण्ड थी
जहाँ भी मैं पाँव फैलाती
तुम्हें पाती
तुम्हारे स्पंदनों के पालने झूलती
अपना मुँह खोल तुम्हे चखती
वह वक्त था
जब हम केवल दो थे
हम दो
सिर्फ दो
2
पहला
पहली आवाज
वह तुम्हारी नहीं थी
हवा चीर रही थी
निन्देह
तुम्हारे हाथ मेरी
झुर्रीदार त्वचा पर
तुम्हारे होंठ
मेरे माथे पर
तुम्हारे स्तन
मेरे होंठों पर
इम मग्न थे
इसी खेल में
कि तुम गायब,
अरे यह रही
फिर गायब
गायब, गायब, गायब!
3
चाँद और धरती के बीच में
उस वक्त मैं बच्ची थी
हिंडोल रही थी, चान्द और
धरती के बीच
झूल रही थी बिंधी नाभी से
गुब्बारे की सैर
तुम देख रही थीं
उस वक्त मैं बच्ची थी
जो धपाक से उतरी सड़कों पर
आसमानी बरसाती बूटों में
तुम फुसफुसाई
कुछ चीज ऐसी होती है
जिसे पंख कहा जाता है
4

तुमने मुझे बताया
तुमने मुझे बताया
ओस की बून्दों के बारे में
बादलों तक उड़ने वाली
और काली चिड़िया के बारे में
जो यूरोप को पार कर जाती हैं
चित्रकार के बारे में
जो वेटिकन के एक दुर्ग में
छत के नीचे से गुजरा
तुमने मुझे बताया
चीलों के अण्डों के बारे में
तितली की इल्ली के बारे में
ध्वनियों के बारे में जो स्वरों में
परिवर्तित हो जाती हैं
और शब्दों के बारे में
जो परिष्कृत हो जाते हैं
स्वर लहरियों और
स्वर चिन्हों में
बन जाते हैं वाक्य
वृहद पुस्तकालय
या फिर बदल जाते है
संगीत में
तुमने बताया उसके बारे में
जो हमारे लिए कुर्बानी देने आया
तुम बोली
उसके बारे में जो हम करना चाहते हैं
पर कर नहीं पातें
और उसके बारे में
जो हमने किया
पर करना नहीं था
मैंने दुछत्ती से पुरानी साइकिल निकाली
और पहाड़ी की तरफ चल दी
एक गड्ढ़े में गिर गई,
छिले घुटनो को लिए
मैंने देखा कि
एक परी आसमान में
साइकिल चला रही है
तुमने नहीं बताया
दानवों के बारे में
बौने या विशालकाय
पहाड़ों में या घाटियों में
जो छिप जाते हैं रातों में
और गहन झरनों में
जब मैंने उनकी दहाड़ सुनी
तुम मुझे पुरानी नदी के ऊपर
बने पुल पर ले गई
हम टहलने लगे
आगे, पीछे, आगे
पीछे
5
कदम
उस वक्त
जब मैंने पहला कदम भरा
तो तुमने मेरा हाथ कस कर पकड़ा
अब हम कमरे चलते हैं तो
मैं तुम्हे सहारा देती हूँ
मैं महसूस कर पा रही हूँ कि
तुमने काफी लम्बा रास्ता पार किया
6
धीरे-धीरे बरस गडमड्डा गए
धीरे - धीरे बरस गडमड्डा गए
जैसे कि बसन्त में भेड़ें
पहाड़ी पर फैल जाती हैं
तुम हौले से
झुकी , मेरे माथे पर
चुम्बन देने के लिए
और हम दोनों हँस पड़े
एक साथ उस वक्त पर
जो गरमी की स्पंदित सुबह में
क्रीड़ा कर रहा था.
7
अरी रिरियाती माँ, रोटी माँ

अरी रिरियाती माँ, रोटी माँ
मोतियों से बनी माँ, प्रार्थना से बनी माँ
रगड़ती माँ , भागती माँ
बड़बड़ाती माँ, रेशम सी माँ
भ्रमित माँ, डपटती माँ
सुनती माँ, लोरी माँ
अरी,केतली माँ, रोती माँ
पेटीकेक माँ, प्यारी सी लड़की माँ
सहेजती माँ, सम्भालती माँ
चाँद माँ, सुबह माँ
योद्धा माँ, गर्भ माँ
अरी माँ!
8
मैं तुम्हे देखने की कोशिश करती हूँ
मैं तुम्हे देखने की कोशिश करती हूँ
लेकिन तुम छोटी , और छोटी हो रही हो
मुझे तुम्हें उठाना और
मुलामियत से
कस कर पकड़ना पड़ता है
वस्तुतः मैं जानती नहीं कि
तुम कौन हो
मुझे अपनी आँखे बन्द करनी पड़ती है
तुम्हारे खोजती दृष्टि को
याद करने के लिए
तुमने मुझे देखा ना माँ!
निसन्देह
तुमने देखा कि वह मैं थी
बस मैं, मेरा जैसा कोई दूसरा नहीं
निसन्देह तुमने देखा
क्या मैं दुनिया की सबसे सुन्दर बच्ची थी
और तुम दुनिया की सबसे सुन्दर माँ
9
तुम चिड़िया का पंजा हो
तुम चिड़िया का पंजा हो
पंजे से पैरो वालीं
वसन्त में तुम बछड़ा हो
सर्दी में गिलही
तुम मूली हो
झुर्रीदार सेब हो
तुम साफ पानी में हिलति
दरख्त की डाल हो
तुम घर हो
पवित्र गुदगुदा छिद्र
तुम पेंगुवान की
हिलती पूछ हो
तुम उबलती केतली
और गरम रोटी
तुम सर्दी का सूरज
गरमी का चाँद हो
तुम मन्दिम बाँसुरी हो

10
कसीदाकारी
इसी तरह हमने प्रातः को
सुई में पिरोया
और बेहद होशियारी से
दूरी का अभ्यास किया
घण्टे और सैकिण्ड को
टाँके में लिया
इसी तरह हम ले आए
सूरज और चाँद
और माप ली दूरी
स्वर्ग और त्वचा की
दिन पर बादलों को बिछा दिया
धोबी की धुली चादर सा