मीना चोपड़ा

मीना बहुमुखी प्रतिभा की स्वामिनी हैं | इनका का पहला अंग्रेज़ी कविताओं का संकलन ’इग्नाइटिड लाईन्स’ १९९६ में इंग्लैंड में लोकार्पित हुआ। इनकी कविताओं का अनुवाद जर्मन भाषा में भी हो चुका है। इनका हिन्दी की कविताओं का संकलन जल्दी ही प्रकाशित होने जा रहा है और अगस्त के मध्य मे लोकार्पित होगा साथ ही इनकी अंग्रेज़ी की कविताओं के भावानुवाद का संकलन
भी छ्पने जा रहा है। इनकी कविताएँ अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। २००४ में कैनेडा में प्रवास के पश्चात मिसीसागा (ओण्टेरियो, कैनेडा) के लाइब्रेरी सिस्टम द्वारा आयोजित अंग्रेज़ी कविताओं की प्रतियोगिता में इनकी कविताओं को सम्मानित किया गया। इन्होने दिसंबर २००८ में ICCR के सहयोग से अकशरम द्वारा भारत, दिल्ली में आयोजित ७वें अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी उत्सव में कैनडा का प्रतिनिधित्व किया। मीना एक कवयित्री होने के साथ-साथ एक चित्रकार भी हैं। अब तक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर २५ से अधिक कला-प्रदर्शनियाँ लगा चुकी हैं। इन्होंने २००२ में ’साऊथ एशियन ऐसोसिएशन ऑफ़ रीजनल कोऑपरेशन’(SARAC) द्वारा आयोजित कलाकारों की सभा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। मीना कला-क्षेत्र में हमेशा से
ही बहुत क्रियाशील रही हैं। भारत में "पोइट्री क्लब" की सचिव भी रही हैं। इसके अतिरिक्त कई व्यापारिक एवं कला संस्थाओं की सदस्या भी रह चुकी हैं।

मीना चोपड़ा के बनाये हुए चित्र भारत तथा कई अन्य देशों में सरकारी, व्यवसायिक तथा संग्रहकर्ताओं के कला संग्रहों में हैं।
 


ओस की एक बूँद

ओस में डूबता अंतरिक्ष

विदा ले रहा है

अँधेरों पर गिरती तुषार

और कोहरों की नमी से।



और यह बूँद न जाने

कब तक जियेगी

इस लटकती टहनी से

जुड़े पत्ते के आलिंगन में।



धूल में जा गिरी तो फिर

मिट के जाएगी कहाँ?



ओस की एक बूँद

बस चुकी है कब की

मेरे व्याकुल मन में।



एक सीप, एक मोती


बूँदें!
आँखों से टपकें
मिट्टी हो जाएँ।

आग से गुज़रें
आग की नज़र हो जाएँ।

रगों में उतरें तो
लहू हो जाएँ।

या कालचक्र से निकलकर
समय की साँसों पर चलती हुई
मन की सीप में उतरे

मोती हो जाएँ।

लुढ़क पड़्ते हैं
चूर-चूर सपने
अनदेखी ऊंचांइयों से
बहती रोशनी की
भयंकर भूख को मिटाते।

और
उभर उठता है तब,
अनादि की कोख से जन्मा
सायों का सिलसिला,
एक छुपि हुई
भक्षक अग्नि,
अजन्मी चाह,
धूएं के धागों को पिरोती
सनसनाती लपटें,
खोजती हैं,
आकाश के अन्तराल में
छुपे अचेतन की
चतेन भरी आहटें।
 


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