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ओयविन्द रिमबरिनो (Oyvind Rimbereid)

ओयविन्द रिमबरिद से मेरी मुलाकात बरगन (नोर्वे) में हुई थी। इस यूरोपीय यात्रा में कृत्या का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य था, कवियों के मध्य संवाद.इसी कार्यक्रम के तहत मैंने ओदवे ( नोर्वे की कवयित्री, जिनके निमन्त्रण पर मैं नोर्वे गई थी। ) से कहा था कि वे अधिक से अधिक कवियों से मुलाकात करवाने का इंतजाम करवा दे। नोर्वे में लेखक मंच काफी सक्रिय हैं, उन्हें आपस में मिलने और कार्यशायालाएँ आयोजित करने के मौके भी मिलते हैं।  ओदवे  नोर्ला नामक संस्था की सदस्या है, और अधिकतर लेखकों से परिचित है। ओयविन्द रिमबरिद भी नोर्ला के सदस्य हैं। जब मैं बर्गन आई तो ओदवे ने ओयविन्द रिमबरिद से मिलने का कार्यक्रम भी बनवाया।

निश्चित समय पर ओयविन्द रिमबरिद होटल आ गए, लेकिन उन्हें देख कर लगा कि यह एक बेहद झेंपूं किस्म मुझे इंसान है। मुझे समझ में आ गया कि उनसे कुछ बुलवाना आसान नहीं होगा। वे मुझे लेकर किसी रेंस्तोरेन्ट में जाने वाले थे, जहाँ पर उनकी अध्यापिका पत्नी इंगरिड के साथ डिनर लेना था।

जब हम होटल से बाहर निकले तो बरसात हो रही थी, ओयविनो के पास एक छाता था, हम किसी तरह तरह सेन्टर तक पहुँचे।

ओयविन्द रिमबरिद की पत्नी अध्यापिका हैं और ओयविनो रिमबरिनो की अपेक्षा अधिक सजग लग रही थीं। दोनो कई दिनों से साथ रह रहे थे और एक दो बरस पहले ही शादी की थी। ओदवे ने बताया था कि नोर्वे वासी जो बाकी यूरोपियों की तुलना में काफी परम्परावादी हैं, अमेरिकन संस्कृति से काफी प्रभावित हैं।

ओयविन्द रिमबरिद ने होटल चुनने में भी काफी वक्त लगा दिया, कहीं पर उन्हें शोरगुल सुनाई दे रहा था, तो कहीं पर कुछ और परेशानी थी़ अन्ततः हम एक थाई रेस्तोरेन्ट में जाकर बैठ गए।

जब हम स्थिर होकर बैठ गए तो मैंने उनसे बातें करनी शुरु कर दीं। मैं उनके साहित्य जीवन के बारे में जानना चाहती थी। मैंने उनकी साहित्य यात्रा के बारे में पूछा तो जानकर आश्चर्य हुआ कि उन्होंने अपना लेखन उपन्यास लेखक के रूप में आरंभ किया था, लेकिन बाद में वे कविता के प्रति उन्मुख हो गए। यह बात गले उतरने वाली नहीं लगती है, लेकिन उनका कहना था कि उपन्यासकार के रूप में उन्हें कोई नहीं जानता था, लेकिन कवि के रूप में प्रसिद्ध हो गए। और अद्भुत बात तो यह कि उनकी कविता बिकती भी खूब है।

"मैं सबसे ज्यादा बिकने वाला कवि हूँ," कहते हुए उनके चेहरे झेंप भँरी हँसी थी।

मैंने ओयविन्द रिमबरिद से पूछा कि वे किस तरह की कविताएँ लिखते हैँ तो उनका कहना था कि वे ज्यादातर लम्बी कविताएँ लिखते हैं। उनकी कविताएँ पाँच पृष्ठ से लेकर चालीस पृष्ठ तक की होती हैं।
साधारणतया नोर्वे में लम्बी कविताएँ लिखने का प्रचलन नहीं सा है। वे बताते हैं करीब चालीस सालों से नोर्वे में लम्बी कविताएँ नहीं लिखी गई हैं। ओयविन्द रिमबरिद ने एक और विशिष्ट बात बतलाई कि नोर्वे की लोग गीत परम्परा काफी समृद्ध रही है, लेकिन आधुनिकता के प्रभाव से वह खो सी गई। ओयविन्द रिमबरिद ने अपनी कविताओं में उस लोक गीतात्मक परम्परा को आधुनिकता से साथ मिश्रित करके एक नई शैली बनाई जो जनता में काफी लोकप्रिय हो गई। अतः उनकी कविताओं में संगीतात्मकता प्रमुख स्थान रखती है। भाषा की दृष्टि से भी ओयविन्द ने नए प्रयोग किए हैं, नोर्वेजियन भाषा के शब्दों के साथ स्वीडिश, अंग्रेजी, होलेण्ड की भाषा का सामंजस्य किया है।

विषय के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि उनके प्रिय विषय हैं विज्ञान, मृत्यु, प्रकृति और जीवन। मृत्यु जीवन का सत्य है, लेकिन यह सत्य जीवन की अनुपस्थिति में नहीं है। उन्होंने अपनी एक कविता का उदाहरण देते हुए बताया कि एक कविता उन्होंने अपनी मृत बहन पर लिखी, इस कविता में प्रमुख विषय एक पुष्प के प्रतीक में अन्तर्निहित था। वे बताने लगे कि एक तरह का फूल होता है जिसे स्टेप मदर फ्लावर के नाम से पुकारा जाता है। सफेद,नीला और बैंगनी। यह फूल श्मशान में ही उगता है। बहन के लिए लिखी कविता में मृत्यु स्टेप मदर फ्लावर के माध्यम से प्रकृति में संलिष्ठ हो गई। ऐसे ही एक अन्य एक मीटर लम्बा फूल और वजन करीब दस किलो है। Raflesia जो कि इण्डोनेशिया और मलेसिया में पाया जाता है,इसलिए इसे corpse flower कहा जाता है। इसमें मरे जानवर की बदबू आती है जिससे किटाणु इसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं। इस फूल को केन्द्र बनाकर ओयविनो ने " गाड आफ वार" नामक कविता लिखी । इसके माध्यम से कवि ने शान्ति में निहित युद्ध की और संकेत किया है।

मैं पुनः आश्चर्य चकित थी... विज्ञान के साथ प्रकृति का क्या सामन्जस्य हो सकता है, मृत्यु और जीवन के सम्बन्ध को तो समझा जा सकता है, क्योकि दोनों एक दूसरे के विरोधी होते हुए भी पूरक हैँ। बात इतनी ही नहीं, मजे की बात यह भी कि विज्ञान को लोक मिश्रित शैली में कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है?
लेकिन ओयविन्द का कहना है कि विषय बनाया जा सकता है, बने बनाए विषय पर लिखने की अपेक्षा विषय को बनाने में अधिक ध्यान देना उचित है। global situation को पूरी तरह नकारना संभव नहीं है, और इसके लिए विज्ञान को भी नहीं नकारा जा सकता है।

ओयविन्द नोर्वे में कविता की स्थिति से परेशान नहीं लगते, वे कहते हैं कि यहाँ छोटे से लेकर बड़े तक कविता लिखते हैं। हालाँकि लोग खरीदते नहीं, लेकिन पुस्तकालय में पढ़ते तो है। उनका मानना है कि कविता को लोकप्रिय बनाने के लिए स्कूल से ही ध्यान देना चाहिए। वे इसी तरह के इंस्टीट्यूट में पार्ट टाइम कविता पढ़ाते भी हैं।

अब मैंने ओयविन की पत्नी इंगरिड Ingrid Nielsen से बात करनी शुरु की। वे स्वयं अध्यापिका होने के साथ- साथ ओयविन की सहचरी हैं जो समय-समय पर पति की सहायता करती हैं। वे इस बात को समझती है कि ओयविन्द पूर्वाधुनिक कविता शैली को लती उत्तराधुनिकता में परिवर्तित करने की क्षमता रखती हैं। विषय में पेंच लाकर असामन्य को सामान्य बना देते हैं।

मैंने आखिरी सवाल पूछा कि "आपको कैसे पता लगता है कि ओयविन कविता लिखने वाले हैं, वे मुस्कुरा कर बोलौ कि जब ये बेहद चुप हो जाएँ, घण्टों अपने में खोए रहें तो मैं इन्हे अकेला छोड़ देती हूँ, और कुछ दिनों में मुझे एक कविता मिलती मुझ है, कभी- कभी ये मुझसे संवाद करते हैं, और लिखने पर सबसे पहले मुझे पढ़ाते हैं।

ओयविन्द मुस्कुरा रहे थे- "हाँ मेरी पत्नी मेरी सबसे बड़ी आलोचक है।"

मैं समझ रही थी कि आलोचक ही नहीं जीवन की रीढ़ भी हैं, मैंने उन्हे धन्यवाद दिया और होटल लौटने के लिए खड़ी हो गई।


प्रस्तुति

रति सक्सेना

dr. Rati Saxena

KP9/624, Vaijayant
Chettikunnu, Medical College PO
TRIVANDRUM- 695011
Kerala - INDIA
 


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