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इस अंक में जापानी परम्परागत हाइकू के पतझड़ सम्बन्धी हाइकू के हिन्दी अनुवादों को प्रस्तुत किया जा रहा है। इन अनुवादों का संकलन, चयन एवं अंग्रेजी में अनुवाद युजुरा मियुरा नामक तोकियों के विद्वान लेखक ने किया, जिनका पुनः डा अंजिलि देवधर ने हिन्दी में अनुवाद किया। इस अंक में परझड़ सम्बन्धी हाइकू को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है।



नासरंध्रो के अन्दर से
विशालकाय बुद्ध के
आ रही आज सुबह की धुंध

- कोबायाशी इस्सा

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बिजली चमकी
और एक रात के हेरान की चीख
अंधकार चीरती चली गई

- मात्सुओ बाशो

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एक पतझड़ की सांझ
एक घण्टा विश्राम का
एक क्षणिक जीवन में

- योसा बुसान

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उमड़ती हवाएं
डांवाशोल हो रही
जालीदार, सफेद बुश क्लोवर

- मियुरा यूजुरु

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गौशाला के अन्दर
मच्छरों की मन्दिम गुनगुनाहट-
बाहर पतझड़ की तेज हवाएँ

- मात्सुओ बाशो

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ओह झींगुर!
कबर का रखवाला बन जाना
मेरे जाने के बाद

- कोबायाशी इस्सा

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निशब्द सम्मिलन
मेहमान
मेजमान, और सफेद गुलदावदी के मध्य

- ओशिमा रयोता

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पूर्ण चन्द्रमा के सम्मुख
एक पर्वतीय चीड़ का पेड़
मेरे पुनर्जन्म का प्रतिबिम्ब है

- ओशिमा रयोता

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मेरा मन
शान्त और समर्पित है
जब मैं गिरे हुए पत्तों पर चलता हूँ

- ईदा दाकोत्सु

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जब मैं गुलदावदी देखता हूँ
मेरी आत्मा और हृदय
मोहित होते हैं फूलों की आत्मा से

- ईदा दाकोत्सु

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अकेलेपन से दबे
कबिया का रखवाला
एक के बाद एक घंटा बजाता गया

- हारा सेकीतेई

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ओस की एक बून्द
बैठी एक पत्थर पर
एक हीरे जैसी

- कावाबाता बोशा

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एक कठफोड़वे की ठकाठक
गूंज रही
पर्वतीय बादलों तक

- ईदा दाकोत्सु

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कितनी सुन्दर -
लाल मिर्च
पतझड़ी तूफान के बाद

- योसा बुसान

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लाल व्याध पतंगे
बह रहे एक तरंग की तरह
सुर्ख आकाश की ओर

- मियुरा युजुरु

 

 

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