Vicky Slavuski की कविता

एक ड्रमर का ड्रम
A DRUMMER’S DRAMA
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बहुत समय पहले
न्यु यार्क में
मेरा एक दोस्त था
आइवरी कोट्स (पश्चिमी अफ्रीका )से
उसके पास बहुत सारे उपकरण थे
और बहुत कम पैसा
तो जब चीजें उस के हाथ से
बाहर हो जाती थी
वो अपना ड्रम लेता था
वो पसंद करता था

चिकाचिकादुम चिकादुम चिकादुम

चिकाचिका चिकादुम चिकादुम चिकादुम

वो चीते की तरह घूमता था
वो बौले (baulé) था
वो रख सकता था
एक बोतल अपने सर के ऊपर
उसके अपने छोटे गाँव में
उस ने गायक बनना सीखा
चावल के लिए पानी नापना
अपनी अँगुलियों से

और जब बुढा बुली आदमी
नृत्य के किये मुखौटा पहनता था
वो अपनी घंटी लेता था
और इस तरह बजता था

गिन गिन गिन गिनगिन गिन गिन गिन गिनगिन गिन गिन गिन गिनगिन गिन गिन

गिंग गिन गिन गिनगिन गिन गिन गिन गिंगी गिन गिन गिन न न न न न
 

Translated by Rachana shrivastava

(कविता का शेष भाग)


सिंगोनिया- की कविता

मरीचिका


दहलीज को पार करने को
बिना यह जाने कि
तुम बाहर जा रही हो
या भीतर

या फिर कि यह रिक्तता कहाँ
ले जाएगी , जिसे तुम .
जानते तो हो, पर कभी देखा नहीं

गलियारे के अन्त में
एक आदमी मजबूती से
ट्रेडमिल पर चल रहा है
उसका घुरना तुम्हे डरा देता है
वह न तो तुम्हारे करीब आता है
और न ही तुम्हे छूता है
उसका सन्देह तुम्हारे इर्दगिर्द मंडराता है
घिसटता हुआ तुम्हारे करीब आता है
और तुम्हारे भीतर चीत्कार पैदा करता है

गलियारे के अन्तिम छोर वाला आदमी
तुम्हारे माँस से ज्यादा कुछ चाहता है
वह, जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते
जिसे चुराने के लिए शून्यता की जरूरत है

अब वहाँ दरवाजा भी नहीं है
ना ही दहलीज और ना ही चौखट
ना ही अन्ति छोर, लेकिन आदमी अपनी
साँसों को संभालता हुआ तुम्हारे सीने में
चलता जा रहा है

यह जानते हुए भी कि वह फाँस नहीं सकता
परछाई, जो उसे दुहरा रही है
दृष्टि जो उसको हिला रही है
वह केवल एक देह है जो ट्रेडमिल पर चल रहा है
और तुम एक कथा हो
पहले से कुछ ज्यादा
उससे भी ज्यादा , जो तुम हो सकती हो।

(सिंगोनिया की अन्य कविता)


Tenzin Tsundue की कविता

जब धर्मसाला में बारिश होती है.


जब धर्मसाला में बारिश होती है
बारिश की बूँदें बॉक्सिंग ग्लव्ज़ पहन लेती हैं
हज़ारों की संख्या में
वे मेरे कमरे पर बरसती हैं
और इसे पीटने लगतीं हैं बे तरह
अपनी टीन की छत के नीचे
मेरा कमरा भीतर से रोता है
और भिगो देता है मेरे कागज़ों को
मेरे बिस्तर को.

कभी कभी एक चालाक बारिश
आती है पिछवाड़े से

गद्दार दीवारें अपनी एड़ियाँ उठाती हैं
और एक छोटी सी बाढ़ को भीतर आने दे देती है
मैं अपने बिस्तर के टापू पर बैठ कर
अपने बाढ़ग्रस्त देश को देखता हूँ

आज़ादी पर नोट्स
जेल के संस्मरण
कॉलेज के दोस्तों की चिट्ठियाँ
ब्रेड के टुकड़े
और मैगी नूडल्ज़
सतह पर तिर आते हैं सहसा
मानो समृतिपटल पर कुछ भूली बिसरी यादें.

तीन यंत्रणा भरे महीने
मॉनसून के
सूई की नोक जैसे पत्तियों वाले चीड़वन
स्वच्छ धुला हुआ हिमालय
चमकता है शाम की धूप में.

जब तक कि थम नहीं जाती बारिश
और मेरे कमरे पर बरसना नहीं छोड़ देती
मुझे अपने टीन छत को सांत्वना देनी है
जो अपनी ड्यूटी बजा रहा है
ब्रिटिश राज से ले कर अब तक
इस कमरे ने अनेक बेघरों को शरण दी है
पर अब इस पर नेवलों, चूहों, छिपकलियों
और मकड़ियों का कब्ज़ा है
जिस के एक हिस्से का मैं किराएदार हूँ

घर की जगह एक किराए का कमरा
जिस के अस्तित्व पर तुम तरस खा सकते हो
मेरी कश्मीरी मकान मालकिन
अस्सी बरस की उम्र में
घर नहीं लौट सकती
अक्सर हम तुलना करते हैं
कौन सुन्दर
काश्मीर या तिब्बत ?

हर शाम
मैं अपने किराए के कमरे मैं लौटता हूँ

पर मैं इस तरह मरना नहीं चाहता
कहीं न कहीं
कोई रास्ता होना चाहिए

मै अपने कमरे की तरह नहीं रो सकता
मैं बहुत रो चुका

जेल में
हताशा के छोटे छोटे क्षणों में

कहीं न कहीं
कोई रास्ता होना चाहिए

मैं रोना नहीं चाहता
मेरा कमरा काफी भीग चुका है.

Transleted by unknown

(Tenzin Tsundue की और कविताएँ)
 


मोया Moya की कविता

हार

एक उम्र के बाद

जब कि उन हम तमाम सफलताओं से
गुजर चुके होते हैं
जिनसे पूरी तरह सन्तुष्ट होना संभव नहीं हो पाया

और अनेक असफलताओं के बाद
जिन्हे हम सुधारना चाहें

हम और अधिक समझदार बन जाते हैं
और अधिक समझदारी से
तैयारी करने लगते हैं

उन असफलताओं के लिए
जो अभी होनी बाकी हैं।

 

Transleted by Rati Saxena

( मोया Moya की और कविताएँ)


डितर बर्दल ( जर्मनी ) की कविता
हिंदी अनुवाद -दुष्यंत

कोट् फैमिली
पीटर वाग के अंग्रेजी अनुवाद से

दादी
दादा
मां
पिता
लड़की

बेटा
कोट्

विशेष टूरिस्ट प्रस्ताव
पीटर वाग के अंग्रेजी अनुवाद से

विमान
एंतोनोव

टहरना
बंगलोव

गाय का मांस
स्ट्राग्नोव

भोजनोपरांत मिष्ठान
मलाकोव

काकटेल
मोलोतोव


( डितर बर्दल की अन्य
कविताएं
)



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