सोनेट मंडल

 

लोहार और उसके हीरे

मणिभ टूट गया
लोहार ने यह देखा
और भयंकर औजारों से
उसे ठीक करने लगा
मणिभ ज्यादा टुकडों में बदल गया
वह फिर काम करता रहा
और इस बार हजारों टुकडे बने
वह मुस्कुराता है
उसकी मेहनत अप्रत्यक्ष हो जाती है
उसे थैली में डालकर
वह आगे बढता है
वह उसे ठीक कर रहा था
और वह अब हीरा बन गया है
गंवारों के लिए
हमारे मन को भी
एक लोहार की जरूरत है


सावधान

मेहनत करो
बाडा मजबूत हो
पूर्वजों के सिर और उंगलियों से
आगे खडे रहो
तुम्हारे तलवार का चमक देखकर
सूरज छिप जाए
तुम्हारे चमके के चारों ओर
मधुमक्खी भी न उडे ण
मधुमक्खियों की आवाज
तुम्हें वच्चीभूत न करें
वे बहाने में गठित परजीवी है

मेरी आंसूओं का तालाब

मछलियॉं पकडते हुए
एक दो तीन
तीन बार में तीन
मेरे दादाजी ने मुझे प्रोत्साहित नहीं किया
उनके लिए यह बडी बात नहीं है
मैं जब भी यहां होता था
या फिर यहां आता हूँ
हमेच्चा मछली पकडता हूँ
लेकिन यह जगह अब पहले जैसा नहीं है
वे बूढे हो गए हैं
और मैं पानी में अकेला जाने से डरता हूँ
काले , नीले ,हरे पानी के कारण नहीं
बल्कि अजगर सा
मुझे घेरते विद्गोह, गृह. विरह
के खतरे में
मुझे उठाकर फेंको
और मेरे सहनशक्ति को खिलाओ
मेरे संजोए रखने की चीजें
मेरी आंसू बगल में दूसरी तालाब बनाएगी
और शायद मैं उसमें मछली पकडूं

अनुवाद - संतोष अलेक्स


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