मुहम्मद अयूब बेताब

 

मुहम्मद अयूब बेताब कश्मीरी कवि हैं, आपकी कविताओं में कश्मीर का दर्द उभरता है, जो बिना किसी साम्प्रदायिक दुर्भावना केमानवता के लिए हैं।

तीली

वहाँ पड़ी है आखिरी तीली
सहेज लेना
संभाले रखना उसे
क्या जानिए
कोई घर अभी बचा रह गया हो
खाली...
अनजला...
साबुत!

बदला

बहुत सारी ढेर ढेर
गिरनी चाहिए बर्फ
हमें बनाना है उसका बुत
जिसे हम जीत नहीं सके
काबू नहीं कर सके हम जिस पर

जुदाई

यह बात कवि रसूल मीर से कभी मत
कहना
हरगिज न कहना
उसकी केसर क्यारी
लग गई विदेशियों के हाथ


कश्मीरी से अनुवादः इच्छुपाल सिंह  (साभार वसुधा से
)


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