अनीता वर्मा


अनीता वर्मा का नाम आज सर्वाधिक चर्चित है। अपने संसार में रहते हुए भी वे जो कुछ रच रहीं हैं, कविता जगत उसे स्वीकार कर रहा है, संभवतः यह कवि की बहुत बड़ी विजय है। अनीता वर्मा की कवि दृष्टि किसी छद्म को रचने की जगह सत्य के विभिन्न रंगो को दिखा रही है। इस अंक अनीता वर्मा की एक जन्म में सब कविता संग्रह से कुछ कविताएँ प्रस्तुत कर रहे हैं।

इसी तरह

तुम शुरुआत हो इस अनन्त की
मैं रह सकती हूँ किसी भी शक्ल
जो तुमसे गढ़ी जाती है
तुम्हारे आकार ‌और अनुभव में
मैं किसी विश्वास की तरह हूँ
तुम्हारे बुखार में ठंडी बून्दों की तरह
तुम्हारे कोहराम में मौन की तरह
मैं हूँ तुम्हारे शुरुआत ‌और तुम्हारे अंत में

रात के बाद

पवित्र प्यार
भोर की उजास
फिर लौटेंगे
रात के बाद।

न बोलो

इस आवाज में मत बोलो
तुमने कहा
यह आत्मा की आवाज ‌और नदी की पवित्रता की है
इससे आगे क्या शेष रह जाएगा

मैं नहीं उठ पाऊँगा फिर
एक गहरे स्वप्न में जगा
मैं तुम्हे प्यार कर सकूँगा
अगर तुम न बोलो।

बुजुर्गों से

हम चलते रहे अपनी चाल
आपको पीछे
कर चुप्पी को अनसुनी कर
हम गिरते रहे अपने हाल
दरवेश किस्से सुनाते रहे नौजवान पैंचे लड़ाते रहे
इसी बीच बाजार में बिकने लगे नाती पोते।

 


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