बसन्त जैतली
 

 

आशा


दिन भर
यों ही करते रहना
कुछ न कुछ
मतलब -बेमतलब,
रात में सो जाना
होकर मदहोश
यह सोचते हुए
कि कोई सुबह तो होगी
जो होगी ही नहीं |

 

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