Anastassis Vistonitis


Translated in to English by Danid Connolly.
Translated from English to Hindi by Rati Saxena

ए आर एस पोइतिका

कविता कोई पत्ते नही
हवा बुहार दे जिन्हें सड़कों पर
यह समन्दर भी नहीं
जिसपर लंगर डाल ले जहाज
नहीं है नीला आसमान
और स्वच्छ पर्यावरण
कविता दुनिया के
सीने पर गड़ा एक खूंटा है
कस्बों में सीधा घुपा
चमकदार चाकू है
कविता सन्ताप है
एक चमकदार धातु है
बर्फ और गहरा घाव है
कविता कठोर है
पोलिहाइड्रल हीरे सी
कठोर, तराशा हुआ संगमरमर
गरजती एक नदी एशिया की

कविता आवाज नहीं है
न ही चिड़िया की बींट
यह गोली है
इतिहास के क्षितिज में
कविता फूल नहीं जो कुम्हला जाये
यह संलेपित दर्द है


Ars Poetica is a term meaning "The Art of Poetry" or "On the Nature of Poetry". Early examples of Artes Poeticae by Aristotle and Horace have survived and many other poems bear the same name.


2
अनाबेल ली

तुम्हारी आँखें
पाले और महावृष्टि के साथ
जाड़े का उत्तरार्ध है
अनजाने पदचिह्न और धूल
उतार फैंकने वाला सुनसान कब्रिस्तान हैं
बरसाती खून तारों और फूलों की, और
देह का खून हैं


तुम्हारी आँखे खोखली दीवारें
जिससे कि विदेशी सेना गुजर सके
समन्दर के ऊपर से हवा की ठिठुरन हैं

झुर्रियाँ भविष्य में फीकी पड़ जाती हैं
रात खाली कफन में कसमसाती है
रौशनी से भी ज्यादा गहरी
आसमान धरती पर दफन हुआ
तटों की खोखली खोपड़ियाँ
समुद्री शैवाल पर परावर्तन
रोशनी की मोमबत्ती बन गया
भूमिगत धाराएँ और अंधकार

तुम्हारी आँखें
मौत और महामारी से भरपूर हैं

Annabel Lee" is the last complete poem[1रosed by American author Edgar Allan Poe. Like many of Poe's poems, it explores the theme of the death of a beautiful woman.[2] The narrator, who fell in love with Annabel Lee when they were young, has a love for her so strong that even angels are envious. He retains his love for her even after her death. There has been debate over who, if anyone, was the inspiration for "Annabel Lee". Though many women have been suggested, Poe's wife Virginia Eliza Clemm Poe is one of the more credible candidates. Written in 1849, it was not published until shortly after Poe's death that same year


3
NON EST

सुनसान सड़कें, पितलाये क्षितिज
खाली कुर्सियां और उसके पदचिह्न
एक गुप्त बुखार शहर खा रहा है
छितराई रोशनी, फीका रक्त
उसने अपनी जेब में अपनी उंगलियाँ चटखाईं
अपने दीमाग को वाष्पित होते देखा
अटल, सुलगने को तैयार
एक घायल दिन, वह फुसफुसाता है
पदचिह्न, फिर पदचिह्न, गली से दूर तक
पदचिह्न दूर पदचिह्नों से..

4
नरक लण्डन जैसा ही शहर है

सूरज- भूसा भरा बाज
समन्दर- पानी की दीवार
लकवा ग्रस्त रोशनी दूर काँप रही है
मोटरें जगह पार कर रहीं हैं
परछाई, गतिहीन गलियाँ, इमारतें

लयहीनता
घोंघे की तरह बन्द होता एक शब्द
और फिर कसाईघर - स्मृति, उसकी
लाल, रक्तिम,
गहरी दृष्टि में कलिया गईं
जो दूसरे समुद्रों को पीछे छोड़ देतीं हैं

वह पुनः प्रौत्साहन की चाहना करता है
जब कि रोशनी उसे नंगा करती है
जब कि दिन उसपर फन्दा कसता है


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