कृत्या प्रकाशन की  पुस्तकें
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वैश्विक पटल के इस कठिन दौर में विश्वबन्धुत्व की बात करना जितना मुश्किल है, उतना जरूरी भी है। मुश्किल इसलिये कि व्यवसायिकता के क्षेत्र में जहाँ बाह्य रूप से सब कुछ समान सा लग रहा है, उतनी ही तेजी से भीतरी खोखलापन उभरता जा रहा है। हालांकि बाहरी उत्थान या विकास किसी भी समाज या देश के लिये जितना जरूरी है, उतना ही आत्मीय अथवा सांस्कृतिक व कलात्मक उत्थान भी आवश्यक है। कविता का सम्बन्ध इसी आत्मीयता से है।

इस कठिन दौर में जब कि विश्व भर में भौतिक विकास की कोशिशे नाकाम सी लग रही हैं, अर्थव्यवस्था के तमाम नियम फीके पड़ रहे हैं, आत्मीय अथवा भीतरी विकास को भी दरअन्दाज किये जाने के कारण हम एक ऐसे रास्ते की और जो निसन्देह हमें मानवता की ओर नहीं ले जाता। है।

ऐसे कठिन दौर में कविता क्या कर सकती है, यह मेडिलिन पोइट्ड़ी फेस्टीवल से समझा जा सकता हैं जिसने २३ वर्षों में नशे और ड्रग की जमीन को कविता और कला की जमीन के रूप में पुनरप्रतिष्ठा दी। कृत्या इसी कड़ी में स्थापित वर्ल्ड पोइट्री मूवमेन्ट की फाउन्डर मेम्बर भी है।

कृत्या ने २००५ में एक छोटी सी कोशिश आरम्भ की थी, बिना किसी भूमिका और तैयारी के... और पूरे आठ वर्ष से हम इस कोशिश को अंजाम देने का प्रयास करते रहे। कृत्या में हमने अपने लिये कुछ दिशाएँ निर्धारित कीं, जैसे हम जमीनी भाषाओं से जुड़ी कविताओं और कलाओं की ओर स्वयम् पहुँचेंगे, कविता को केन्द्रित करते हुए अन्य कलाओं में भी कविता को खोजेंगे, और भारतीय भाषाओं को वैश्विक कविता से जोड़ने की कड़ी में अनुवाद को रेखांकित करेंगे।कविता महोत्सव को हमने कारपरेट से दूर रखते हुए सदैव सरकारी संस्थाओं एवं शिक्षा संस्थानों की सहायता मनाने की जिद भी रखी। इसी कड़ी में हम आठवां कविता महोत्सव मनाने वर्धा में एकत्रित हैं.

जब हम भारतीय बन्धुत्व की बात करते हैं तो इस बात को समझते हैं कि यह बन्धुत्व स्वत्व को खोने की दिशा में नहीं होना चाहिये, अपितु अपनी अपनी जड़ों को सुरक्षित रखते हुए , अपनी अस्मिता को बचाते हुए आपस में जुड़ना हमें सिर्फ कविता सिखा सकती है, जिसे समस्त व्यवसायिक ताकतें पूरी तरह से नकार रही हैं. फिर भी हम आत्मबल से कविता और जुड़ी कलाओं के साथ उपस्थित हैं।
हमे मालूम नहीं कि हम अपने इस कर्म को जीवित रख पायेंगे या नहीं, फिर भी कामना करते हैं कि इस कठिन वक्त में वैश्विकता को नये अर्थ में समझने की कोशिश करें,,,,


आप सब का कृत्या की इस कोशिश में स्वागत है


रति सक्सेना


     पत्र-संपादक के नाम                                                  
 


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