सेरजिओ बदिल्ला (Sergio Badilla) चिली के कवि हैं। वे सुप्रसिद्ध लेटिन अमेरिकन कवि हैं जिन्हें broadest Nordic influence का कवि माना गया है। 1981 से 1987 के बीच उन्होंने तीन किताबों की रचना कीThe Dwelling of the Sign, Oniric Song and Reverberations of Aquatic Stones. कवि के साथ वे अच्छे अनुवादक भी हैं जिन्होंने स्वीडन, फिनिश, इंगलिश, फैन्च, और लेटिन से अनेक अनुवाद किये हैं। आपकी कविताओं में लोक और मिथकों का सटीक प्रयोग हुआ है, कई कविताओं में दन्तकथाओं का भी अभूतपूर्व प्रयोग देखा गया है। आपके अन्य पुस्तके हैं...The Fearful Gaze of the Bastard (2003), Transreal Poems , Some Gospels (2005). वे अपनी कविताओं में एक ऐसे तिलस्मी दुनिया को रचते हैं, जिसमें जिन्दगी के गीत रूप में विभिन्न आयाम दृष्टिगोचर हुए हैं। वे पाब्लो नेरुदा के उत्तराधिकारी कवि हैं।

वे जो कुँवारियां हैं

वे कुंवारियाँ, जो हमें उल्काओं वाले आसमान के नीचे
नीन्द की सवारी में खलल डालती हैं
खून पीने वालों जैसी संलग्न हैं
प्रौढ़ता को बढ़ते हुए खजुराहो के मन्दिर में
जब कि मैं अजीब बुखार में पसीने से भीग रहा था
वह गर्मी की रात थी और आग से भस्म
जंगल में ब्रह्माण्ड मिल गया था
दीवार पर चमकता पानी और मच्छर
झाड़ियों के पीछे से एक भूखे शेर घबरा देने वाली गुरगुराहट
वे अक्षत योनियाँ, जो हमारी नीन्द में खलल डालती हैं
एक चक्रवाती अन्धड़ रिक्त और जलहीन
बिल्कुल एक आवारा आत्मा जैसा


बचाव की रात

वे कभी नहीं जान पायेंगे कि रात को क्या हुआ जब
तुम देह को सहलाते अंधेरे में पनाह ले रहे थे
जब कि खिड़की में सड़क आसमान तक
पसरी पड़ी थी
ऐसी कोई राह नहीं थी जो ब्रह्माण्ड के भूल भुलैये में
छोटी गली ना पकड़ती हो
छालों से भरे उनके दैविक पदचिह्न बर्फ पर फिसल रहे थे
और मस्त्य अपने को दलदली चट्टानों पर चिह्नित कर रही थीं
वे नहीं जानते थे कि क्या होगा
उस रात जब वे रेंगते कीड़ों वाली धर्मशाला में पनाह ले रहे थे
जब आग ने अपनी कालिख राख
तुम्हारे सीने के रहस्यों पर डाल दी


तूफानी दिन

वांग वी सन्देह में है
कौन सी परेशानी उसे लीयान के बारे में सोचने को मजबूर कर रही है
क्या तूफान तांग डाइनेस्टी पर पीछे से चूहे सा गुर्रायेगा?
पाले के नीचे दबे रुपहले गुच्छे सा
बकल की कील नहीं लगती
जब छांगि अनायास विपदा में गायब हो गई
कोई बहाना नहीं बनाया जा सकता
इसलिये वह ऐसे उदास है जैसे कि इमली के पत्ते ऐसे झड़ रहे हैं
जैसे की राजसिंहासन डौल रहा हो
और फिर भी वांग वी जिंदा है
उसका दीमग अटकलों से भन्ना रहा
इन सारे तूफानी दिनों में


विदा

अपनी अनुपस्थिति के सामान के साथ मेरी माँ अनेक शिकायतों के बीच
पत्थरों वाले शान्त पड़ोस से बहुत दूर है
जब कि समन्दर उसको अपनी चमक में पकड़े
और गोरैया एवन्यु में पिट्सपोरम के दरख्तों पर मण्डरायें
वहाँ दुस्वप्न के सिद्धान्त और सन्देह है
जब रातें उड़तीं हैं परछाइयों के बीच
भोर की समतल जमीन की राह में


विस्मृति

जब धरती ने अचानक घूमना शुरु कर दिया
Hayashi Fusao कौन सा गीत गा रहा था?
अपनी झोपड़े में धुत हो
जर्जर चरखी सा झंकारते हुए
ये honjozo-shu थी या फिर भूकम्प
जिसने उसके उन्माद की जंजीरे खोल दीं
क्या फरक पड़ता है
मुझे वह दिखाई देना बन्द हो गया
विक्षिप्तता ने उसकी रुह को तंग कर दिया
और उसकी जबान को ध्वस्त कर दिया
वक्त ने व्यवहारिक बुद्धि को ओझल कर दिया
और अब Hayashi Fusao चुप है
उसका दीमाग पूर्ण विस्मृति की रात्रि


चील की उड़ान

एक युवा भिखारी एक सिक्के की कामना करता है
रुखाई के खतरे के बावजूद
मैं उसकी परेशानी से प्रभावित नहीं होता
नवम्बर मास के उस दिन
जब साफ आसमान में पूर्ण चन्द्र चमक रहा था
प्रकृति अपने पूरे शबाब में थी
दीमाग में अजीब अजीब खयालात भुनभुना रहे थे
और ब्रह्माण्ड अजनबी नहीं लग रहा था
लेकिन अत्यन्त गूढ़ चमकीली हवा में
चील के भव्य प्रसार में
एक युवा भिखारी एक सिक्के की कामना करता है


वह युवा महिला

अधजली मोमबत्ती की रौशनी में
युवा महिला की लापरवाह फुसफुसाहटें मेरी हैं
उस गप्पबाजी को कैसे बयान करें
तारों की भगौड़ी दमक के सामने
जब कि अटारी में से परियाँ चुपचाप उड़ रही थीं
और नवीन चन्द्र भुनगों को सम्मोहित कर रहा था
ऐसे में उस अजीब से मोमबत्ती की रौशनी में
चल रही चटर पटर को कैसे बयान करें

कोहरे की सीधी चट्टान
आकस्मिक आवेगः
रात नदी में फिसल रही थी

ओझा का स्वप्न

उन दिनों मैं एक ओझा के उन्माद से ग्रस्त था
जिसने कि रेगिस्तान के नीचे एक रेगिस्तानी जमीन को खोज निकाला था
रेत के करीब रूखे पत्थर से बनी उजाड़ दीवार,

स्तब्ध स्मृतियाँ जो मेरे कमजोर पिता से मिलती थीं
ऐसी भोलापन नहीं था जो सन्देह की जगह मरीचिका,
जो मृत्यु लाती है को घुसपैठ करने दे
पीछे से बंजर जमीन से अपने दर्दभरे जवाब सुनने को
मैं ऊँचे पठार की और चला आया,
मैदान में तारे देखता हुआ रात भर भटकता रहा
समतल धरा में निरे सिद्धान्तों वाले दिन
चूना पत्थर पर चमकते चिह्न

दुर्भाग्य के कगार पर एक परिदृश्य
जहाँ बाहर संभवतया मेरे भाई है या फिर शत्रु?
या फिर मेरे पिता भंवरे की टांगों मे
लक्ष्यरहित उड़ रहे है ब्रह्माण्ड की कठोरता में

 


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