मैं कृत्या हूँ
कृत्या - मारक शब्द शक्ति,
कृत्या - जो केवल सच के साथ चलती हो,
कृत्या - जो पूरी तरह सही का साथ देती हो ।

 
 
 

रचनात्मक क्षणों में कवि के पास कविता होती है या कुछ भाव, कुछ विचार होते हैं या मात्र प्रतीक। या फिर शब्दों का अंबार होता है, जिसमें से चुन चुन कर कवि अपनी कविता रचता है। कविता अपने आप चल कर आती है, या फिर कवि को उसके पास जाना पड़ता है? क्या कविता भी अपने जन्म के बारे में उसी तरह चिन्तित होती है, क्या वह भी अपने रचनाकर्ता से सवाल पूछती है जिस तरह कि हम कभी कभी अपने ईश्वर से सवाल करते हैं।

रति सक्सेना
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...बेशक पता है मुझे
कि गिरगिट होता है
आने वाला कल
फिर भी मन भाता है
यूँ देखना उसे
ज्यों साज- संभाल रही हो
अनदीठा समय
और डली- डली
फाँक-फाँक
भर रही हो मर्तबानों में
स्वाद सुरक्षित एवं शाँत
अचार डाल रही मेरी पत्नी
महफूज कर रही है
पूरा एक बरस

अंबरीश

तुम्हारी मन पसन्द कविता
शहर के आस- पास और बीच शहर में खोजता हूँ
लड़ते झगड़ते ‌और प्रेम करते लोगों के घरों और गलियों के मुहानों पर
तुम्हारी मन पसन्द कविता तो मिलती नहीं
मैं रोज निकलता हूँ
आकाश और धरती पर
तुम्हारी कविता के लिए

रवीन्द्र स्वप्निल प्रजापति
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 संस्कृति समुदाय को प्रकृति से कुछ परे ले जाती हुई एक ऐसे कृत्रिम वातावरण का निर्माण कर देती है जो कृत्रिम होते हुए भी कृत्रिमता का आभास नहीं देता। वहीं तकनीक एक ऐसी प्रक्रिया है जो जीवन को सरल बनाने और विश्व के अन्य तत्वों के बीच अपने वर्चस्व को बनाए रखने के उद्देश्य से मानव और समाज द्वारा निर्मित होती है। इसमें निरन्तर विकास की संभावनाएँ होती हैं। कला इन दोनों की सहगामिनी होते हुए भी अपने विशिष्ट स्थान रखती है। यह मानव के मानसिक विकास के साथ साथ भावनात्मकता , कल्पनाशीलता और सृजनशीलता को उल्लेखित करती हुई उसके कृत्यों को सृष्टि निर्माण के सहतत्वों के रूप में स्थापित करती है।

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उन्होंने नश्तर से चीर निकाल लिया
खूबसूरत खिलौना माँ के पेट से
इस गुफा के बन्द दरवाजे के सामने
कोई अलीबाबा नहीं जो मंत्र जाप करे
ना ही कोई जंगी घोड़ा खड़ा है इसके करीब
लेकिन क्यों काट डाला उन्होंने वह पुरातन आम का दरख्त
जिस पर सुखाए थे मैंने अपने सपने सूखने को?
अब आगे नहीं जा सकती मेरी नाव मछलियों के शिकार के लिए....
अपने भविष्य के तले में देखती हूँ मैं
मौत से सफेद पड़ी तैरती मछलियाँ

*
आदमी एक मौसम है
लेकिन तुम अनन्त
यह सिखाते हुए तुमने मुझे
उछालने दी अपनी जवानी सिक्कों की तरह
अनेकों हाथों में
साथ दिया मुझे परछाइयों का
गाने दिया खाली पूजाघरों में

कमला दास
 

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दुर्भाग्य ना होता तो क्या संभव था यह?
जनावाद सुन वे क्यों मुझ से विरक्त होते?
गर्भिणी स्त्री को घोर वन में तज
धरती पालक राम क्यों कर शासन करते?१२९
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शत्रुजयी राम के क्या अन्य भाई नहीं?
क्या वे नहीं कर सकते थे राज्य का शासन?
राम रह सकते थे वन में प्रिया संग
क्या इतना सा स्थान वे हमे दे नहीं सके? १३०
***
पत्नी के सतीत्व पर कोई भी कटाक्ष करे
सह न सकेगा कोई मानव अधम भी़।
उत्तम राजा ने मेरा दोष वेद वाक्य सम
कैसे सुना , सोच सोच लज्जा आती है।।१३२
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कुमारनाशान

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VOL - 1 / PART -9
(फरबरी-2006 )

संपादक :  रति सक्सेना


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