अमिताभ बच्चन



1.
हमारा दर्शन
थोड़ी-बहुत संपत्ति अरजने में कोई बुराई नहीं
बेईमानी से एक फासला बनाकर जीना संभव है
ईमानदारी के पैसे से घर बनाया जा सकता है
चोर-डाकू सुधर सकते हैं
किराएदारों को उदार मकान मालिक मिल सकते हैं
खरीदार दिमाग ठंडा रख सकता है
विक्रेता हर पल मुस्कुराते रहने की कला सीख सकता है
गरीब अपना ईमान बचा सकते हैं
जीने का उत्साह बनाए रखना असंभव नहीं
लोगों से प्यार करना मुमकिन है
बारिश से परेशान न होना सिर्फ इच्छा शक्ति की बात है
खुश और संतुष्ट रहने के सारे ऊपाए बेकार नहीं हुए हैं
लोग मृत्यु के डर पर काबू पाने में सक्षम हैं
पैसे वाले पैसे के गुलाम न बनने की तरकीब सीख सकते हैं
कारोबार की व्यस्तताओं के बीच एक अमीर का प्रेम फल-फूल सकता है
समझौतों के सारे रास्ते बंद नहीं हुए
बेगानों से दोस्ती की संभावनाएं खत्म नहीं हुई
बच्चों और नौकरों को अनुशासन मे रखने के ऊपायों का कोई अंत नहीं
चूतड़ के बिना भी आदमी बैठ सकता है
निरंतर युद्ध की स्थिति में भी दुनिया बची रह सकती है


2.
कलमघिस्सू पत्रकार


जैसे कि हम कलमघिस्सू पत्रकार हैं
जैसे कि बातें बनाकर हम भरते हैं अपना पेट
जैसे कि कलम घिसने केलिए
हमारे पास कई तकिया कलाम हैं
जैसे कि हालात अभी बेकाबू नहीं हुए
जैसे कि चीजें दुरूस्त करने केलिए अभी हमारे पास वक्त है
जैसे कि अभी जून ही गुजरा है जुलाई अगस्त बाकी है
जैसे कि सितम्बर तक कर सकते हैं इंतजार
जैसे कि याद करो पिछले साल भी हमने धोखा खाया था
जैसे कि अभी कुछ कहना जल्दीबाजी होगी
जैसे कि अभी सूरत बदल सकती है
जैसे कि लंबा वक्त पड़ा है
जैसे कि हमारा देश बहुत बड़ा है
जैसे कि औसत बुरा नहीं है
जैसे कि अनिश्चितता बनी हुई है
जैसे कि हालत सुधर भी रही है
जैसे कि संकेत बुरे नहीं हैं
जैसे कि नुकसान की भरपाई की पूरी उम्मीद है
जैसे कि नुकसान भी इतना बड़ा और घातक नहीं है
जैसे कि डरने की कोई बात नहीं है
जैसे कि संकट का सामना करना इतना मुश्किल भी नहीं होगा
जैसे कि कुछ लोग नाराज हो सकते हैं
जैसे कि अंत में नतीजा अच्छा ही आएगा
जैसे कि दौड़ रही है गाड़ी पटरी पर
दौड़ रही है गाड़ी कलमघिस्सू पत्रकार की


3.


पवित्र हत्यारे


पवित्र हत्यारे दिन दहाड़े सरेआम की गई हत्या के प्रेमी होते हैं
इसलिए तर्क और प्रमाण की वे हंसी उड़ाते हैं
वे कहते हैं हत्या ऐसी नहीं हो कि हत्यारे का पता लगाना पड़े
सजा में फांसी उन्हें एकमात्र अपनी चीज लगती है
चौराहे पर फांसी देने का आतंक उन्हें प्रिय है
वे कहते हैं कि हत्यारों की भी जघन्य हत्या होनी चाहिए
वे ऐसी हत्या के पक्ष में होते हैं जिसे देखकर रूह कांप उठे
जिसे याद कर सैकड़ों सालों तक डर लगे
पवित्र हत्यारे कहते हैं कि वे मारे जाने से नहीं डरते
वे कहते हैं उन्हें हत्या में भूल, लापरवाही और क्षमा से घृणा है
वे कहते हैं आदमी को ग्रंथियों से मुक्त होना चाहिए
वे अपने अनुयायियों से मजबूत चरित्र की उम्मीद रखते हैं
वे कहते हैं नींद में की गई हत्या अपवित्र होती है
वे कहते हैं शराब पीकर हत्या करना बहादुरी नहीं है
उनकी नजर में सबसे शानदार हत्या वह है
जिसमें जालसाजी और धोखाधड़ी का सहारा बिल्कुल न लिया गया हो
वे ऐसे कत्लेआम के पक्ष में होते हैं
जिसे देखकर किसी हत्यारे का सर शर्म से न झुके

4.
मेरा भेजा खराब हो गया है
काम वाली बाई का रोना-लड़ना मुझे अच्छा लगता है
लेकिन परेड देख कर मैं सैनिकों केलिए उदास हो जाता हूं
उनके करतब देख मेरा मन रोता है
परेड देखता प्रधानमंत्री मुझे निखट्टु मालूम पड़ता है
मेरा भेजा खराब हो गया है
सलामी लेता राष्ट्रपति
मुझे गोदाम में सड़ता अनाज मालूम पड़ता है
राष्ट्रपति भवन देखकर
जालियांवाला बाग में चलती गोलियों की आवाज सुनाई देती है
जान बचाने केलिए कुएं में गिरते लोग दिखते हैं
रानी एलिजाबेथ याद आती है
मेरा भेजा सचमुच खराब हो गया है
ये राष्ट्रपति, ये प्रधानमंत्री कौन हैं
इन्हें देख जेनरल डायर का चेहरा मुझे क्यों याद आता है
क्या मेरी आंखें खराब हो गई हैं
आकाश में कलाबाजी खाते प्रक्षेपास्त्रों को देख ये क्यों खुश हो रहे हैं
इन्होंने हथियारों के विदेशी व्यापारियों को परेड देखने क्यों बुलाया है
ये उनके सामने गिड़गिड़ा क्यों रहे हैं
इन प्रक्षेपास्त्रों का आखिर ये करेंगे क्या
क्या ये रखे-रखे सड़ जाएंगे
ये कंगाल खेत मजदूरों के किस काम आएंगे
ये प्रक्षेपास्त्र कबाड़ी की दुकान में कब पहुंच जाएंगे
मैं ढक्कन मैं क्या सोच रहा हूं
मेरा भेजा खराब हो गया है
मेरी चीन के लोगों से कोई दुश्मनी नहीं
मुझे अमरीकी लोगों से कोई नफरत नहीं
मुझे नहीं मारना है उन्हें
उनके हाथों नहीं मरना है मुझे
फिर ये लार क्यों टपका रहे हैं आग उगलते तोपों पर
ऊंटों पर बिठाकर ये क्यों घुमा रहे हैं मूंछ वाले इंसानों को
इस नजारे का मैं क्यों आनंद नहीं उठा पा रहा हूं छोटू
क्या मेरा भेजा खराब हो गया है
क्या इसी शक्ति प्रदर्शन का नाम है गणतंत्र
क्या मैं पागल इस गणतंत्र से बाहर हूं
मुझे ये गणतंत्र समझ में क्यों नहीं आ रहा
मुझे अपने समंदर की चौकसी का डर क्यों नहीं सता रहा है
मुझे अपना भूगोल क्यों नहीं याद आ रहा है
मुझे खतरे सूंघने वाले अधिकारी कुत्तों की अहमियत का पता क्यों नहीं चल पा रहा है
मेरा भेजा खराब हो गया है
सावधान की मुद्रा पर मुझे हंसी क्यों आ रही है
विश्राम की मुद्रा पर मुझे हंसी क्यों आ रही है
तुम्हारा ये कदमताल मुझे हंसा क्यों रहा है
ये डरावना माहौल मुझे डरा क्यों नहीं रहा है
ये आजादी का जश्न है मुझे समझ में क्यों नहीं आ रहा है
किसी भावी युद्ध का ये अभ्यास मुझमें गर्व पैदा क्यों नहीं करता
मुझमें किसी प्रकार की संजीदगी क्यों नहीं जगाता
तुम्हारे सैनिक समझौतों पर मैं हंसता ही क्यों चला जा रहा हूं
मेरा भेजा खराब हो गया है
0000


5.
मां
हालांकि मैं सबसे छोटा था
गरीब दुर्बल
पर मां सर्वाधिक मेरे हिस्से में आई
मैं ही था उसका अशिष्ट सेवक
लापरवाह प्रेमी
मैं ही अकेला चूम सकता था उसके गाल
और वही जानती थी बस कि मैं कवि हूं


6.
दूर और पास


एक दूरी से बेटी जानती है वह मां के साथ है
बेटी कहती है ये दूरी नितांत जरूरी है
इसी नतीजे पर मां भी पहुंची है
दोनों कहती हैं सबका अपना जीवन है
दोनों ने मान लिया है कि साथ रहेंगे तो
खटमल की तरह एक-दूसरे का खून पीएंगे
दोनों को लगता है कि हां वे हैं एक दूसरे केलिए
मगर दोनों हंसकर कहती हैं कि दूर रहकर वे ज्यादा पास हैं
कितनी दूरी पर निकटता का अहसास बना रहेगा
ये छलबल से तय होता है हर बार
ये तय होता है मां बेटी की बाज़ीगरी से
दोनों इस छलबल और बाजीगरी में पूरी दुनिया को खींच लाती हैं
दोनों दूर होकर भी पास रहने की विकट कला रोज सीखती हैं
उनकी आजादी और प्यार के बचे रहने की
सबसे जरूरी शर्त आखिर ये दूरी क्यों है
दूरी में अपनी भलाई देखने वाली इन अभिशप्त मां-बेटियों से
कब मुक्त होगी ये दुनिया
लोग कब मन ही मन ये बुदबुदाना छोड़ेंगे
कि हां, दूर रहने में ही भलाई है
कि हां, दूर रहने में ही भलाई है


7.
गोवा


गोवा हमारा हरा-भरा
सारे कवि कभी न कभी यहां के समुद्र तटों पर
चकल्लस कर ही आते हैं
हालांकि वे इसके बारे में लिखते नहीं
क्यों नहीं लिखते
क्योंकि वे उन गरीबों के बारे में लिखते हैं
जिनके नसीब में शौक से और मस्ती करने
गोवा जाना नहीं लिखा
जिनके पास गोवा की सुंदरता बटोरने
और दोस्तो पर उसे न्योछावर करने वाले सेलफोन नहीं हैं
मैं भी उन्हें क्या बताऊं उस स्वर्ग के बारे में
गोअन शराब और खाने के बारे में
बेघर बेजमीन खेत मजदूर
जो करमी, सत्तू और कंदमूल पर जिंदा हैं
क्या करेंगे गोवन बीयर और फेनी के बारे में जानकर
घूमकर तो मैं भी आ गया हूं गोवा
गोवा हमारी कविता में चोर, छुपे खजाने
और हमारी रूग्ण ग्रंथि की तरह ही दाखिल हो सकता है.

 


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