कमल जीत चौधरी
 


दांत और ब्लेड


दांत सिर्फ़ शेर और भेड़िये के ही नहीं होते


चूहे और गिलहरी के भी होते हैं

ब्लेड सिर्फ़ तुम्हारे पास ही नहीं है

मिस्त्री और नाई के पास भी है


 

तुम्हारे रक्त सने दांतों को देख

मैंने नमक खाना छोड़ दिया है

मैं दांतों का मुकाबला दांतों से करूँगा

तुम्हारे हाथों में ब्लेड देखकर

मेरे खून का लोहा खुरदुरापन छोड़ चूका

मैं धार का मुकाबला धार से करूँगा



बोलो तो सही

तुम्हारी दहाड़ मिमिया जायेगी

मैं दांत के साथ दांत बन कर

तुम्हारे मुंह
​में ​
निकल चूका हूँ
डालो तो सही

अपनी जेब में हाथ

मैं अन्दर बैठा ब्लेड बन
​चु​
का हूँ |


०००००००००००


साहित्यिक दोस्त


मेरे दोस्त अपनी

उपस्थिति दर्ज करवाना चाहते हैं

वे गले में काठ की घंटियाँ
​बांधते ​
हैं


उन्हें आरपार देखने की आदत है

वे शीशे के घरों में रहते हैं


पत्थरों से डरते हैं

कांच की लड़कियों से प्रेम करते हैं


बम पर बैठकर

वे फूल पर कवितायेँ लिखते हैं


काव्य गोष्ठियों में खूब हँसते हैं

शराबखानों में गंभीर हो जाते हैं
 


यह भी उनकी कला है

अपनी मोम की जेबों में

वे आग रखते हैं |

००००००


रचनाकार :----- कमल जीत चौधरी
प्रस्तुति -------- मीता दास
 


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