कृत्या 2005
          
कविता का उत्सव

कृत्या ने साहित्य के विशद संसार में पहला कदम रख लिया । कइयों ने खुशी जाहिर की तो कुछ एक ने आलोचना की । कृत्या दोनों की आभारी है! बच्चे का पहला कदम चाहे कितना लड़खड़ाता क्यो ना
हो माता पिता के लिए उत्सव का सबब बन जाता
है, क्यों कि पहले कदम में
चलना ही नहीं बल्कि दौड़ना, चढ़ना और उड़ना भी निहित होता है । कृत्या के पहले कदम ने कविता
प्रेमियों को उत्सव मनाने का अवसर दे दिया । १८
जून को केरल के तिरुवनन्तपुरम शहर के म्यूजियम आडिटोरियम में "कवितोत्सव" मनाया गया । कविता
मात्र अक्षरों मे नहीं है, अन्य कलाओं जैसे अभिनय,
नृत्य, संगीत और चित्रकारिता में भी है । कवितोत्सव
में इन सब
कलाओं की
उपस्थिति थी ।

 


कृत्या 2006

जिन दिनों कृत्या का बीज दीमाग में जड़ जमा

रहा था उन दिनों एक चाह मन में रही थी कि कृत्या की जड़ें कन्या कुमारी से कश्मीर ‌और जैसलमेर से कामाक्षी तक फैलें, और इसकी शाखाएँ चीन जापान से लेकर अमेरिका अफ्रीका तक लहराएँ। यही कारण था कि जिन लोगों को कृत्या से जोड़ा गया, उनमे अग्निशेखर ( जम्मू) किम फाम, (शिलांग) और टी पी राजीवन (केरल) आदि थे। अन्य सहयोगी तो कृत्या के साथ अधिक नहीं चले पर अग्निशेखर जी ने कृत्या को आरंभ से बेहद सक्रिय साहित्यिक सहयोग दिया। उन्ही की बदौलत हब्बा खातून, ललद्यत, अरुणिमाल , और रूपभवानी जैसी कवयित्रियों की कविता से हिन्दी समाज और अंग्रेजी समाज को परिचित करवाने का मौका


कृत्या 2007



monk apoet


 


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

फोटो दीर्घा -2

 

अय्यप्प पणिक्कर ने रति सक्सेना की कविता " एक ऋचा चप्पलों के लिए " के वाचन से कार्यक्रम का आरंभ किया । प्रमुख नाट्यधर्मी कावालम नारायण पणिक्कर ने प्रमुख अतिथि के रूप में अपनी और अय्यप्प पणिक्कर की कविताओं के अभिनय और वाचन से लोगों को अभिभूत किया । जिस वक्त मंच पर अय्यप्प पणिक्कर जी और कावालम नारायण पणिक्कर जी कविता वाचन कर रहे थे, केरल के महान चित्रकार बी डी दत्तन जी चित्र बना रहे थे । इस तरह वाचन, अभिनय और चित्रकला की जुगलबंदी ने कविता में रस, रंग और संगीत भर दिया । इसके उपरान्त सोपानम ग्रुप ने संस्कृत नाटक "आश्चर्य चूड़ामणि" के सीता अपहरण भाग को बड़ी खूबसूरती से प्रस्तुत किया । तपोवन में सीता के सौंदर्य का बीसों आँखों से पान करते रावण की तरह दर्शकों ने द्विगुणित मन से नाटक का रसास्वादन किया । इस  उत्सव में अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ थीः पंजाबी कलाकार नीता महेन्द्रा द्वारा अभिनीत अमृता प्रीतम की कहानीः "कोरी हांडी", श्रीमती पल्लवी द्वारा प्रस्तुत रवीन्द्र संगीत,

 और पाश की कविताएँ । मलयालम कवि विनय चन्द्रन ने भी श्रोताओं के कविता के श्रवणानन्द से परिचित करवाया । कविता प्रेमियों के लिये कवितोत्सव एक यादगार शाम थी, इसमें कोई संदेह नहीं । कविता को उत्सव के रूप मे मनाना कवि सम्मेलन से अलग अनुभूति है........


हमने कृत्या के जन्म के साथ " कवितोत्सव " मनाया और कल्पना की कि पहली वर्षगाँठ कश्मीर की भूमि में हो, वाग्देवी ने कहा "तथास्तु"!!, देखिए हम डोगरी विशेषांक के साथ कश्मीर की साहित्यिक भूमि पर अपनी पहली वर्षगाँठ मनाने के लिए उपस्थित  हो गए।

 

 

 

 

 

मिला। उन्होंने ही अजेय और अरुणा शर्मा जी जैसे कर्मठ कवियों को कृत्या के साथ जोड़ा।

 

 

 

 

कृत्या 2007